15 साल की उम्र में ही छोड़ दिया था घर, 10 राष्ट्रीय और 14 अंतराष्ट्रीय खिताब जीत चुकी हैं मैरीकॉम

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भारत की स्टार महिला बॉक्सर मैरीकॉम ने अपने करियर की शुरुआत से ही धमाकेदार अंदाज़ में हर मैच में जीत दर्ज की है. वह साल 2001 में प्रथम बार नेशनल वुमन्स बॉक्सिंग चैंपियनशिप जीती थीं. अब तक वह 10 राष्ट्रीय खिताब जीत चुकी हैं. बॉक्सिंग में देश का नाम रोशन करने के लिए भारत सरकार ने वर्ष 2003 में उन्हे अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया एवं वर्ष 2006 में उन्हे पद्मश्री से सम्मानित किया गया. साथ ही 2009 में राजीव गांधी खेल रत्न अवार्ड से भी सम्मानित किया जा चुका है.

मैरीकॉम ने बॉक्सिंग के लिए महज 15 साल की उम्र में ही घर छोड़ दिया था. इसके बाद ही वह मणिपुर की राजधानी इम्फाल में रह कर ही बॉक्सिंग की ट्रेनिंग करने लगीं. वहां की स्पोर्ट्स अकादमी में भी रहकर ही उन्होंने पढ़ाई और ट्रेनिंग की थी. इस खिताब से पहले मैरीकॉम ने 2010 तक ही वर्ल्ड चैंपियनशिप्स में 5 मेडल अपने नाम कर लिए थे.

तीन बच्चों की मां मैरी अपनी निजी जिंदगी में इतना व्यस्त रहने लगीं कि एक समय उन्होंने संन्यास लेने की ही ठान ली थी. लेकिन पति और घरवालों के सहयोग से उन्होंने इसे जारी रखा. इसके साथ-साथ ही मैरीकॉम मणिपुर में बॉक्सिंग अकादमी चलाती हैं जहां रहकर वह और बच्चों को भी ट्रेनिंग देती हैं और खुद भी बॉक्सिंग की प्रैक्टिस करती हैं.

मैरीकॉम ने विशेष इंटरनेशनल प्रतिस्पर्धाओं में कुल 14 गोल्ड मेडल अपने नाम किए हैं. उन्होंने महिला वर्ल्ड चैंपियनशिप में 6 गोल्ड हासिल किए हैं. इसके अलावा 5 गोल्ड एशियन महिला बॉक्सिंग चैंपियनशिप में और 1-1 गोल्ड एशियन इंडोर गेम्स, एशियन गेम्स और कॉमनवेल्थ गेम्स में जीता है.

मैरी कॉम इस जीत के बाद भावुक हो गईं. मैरी ने कहा कि, ‘मैं इस जीत के लिए अपने सभी प्रशंसकों का शुक्रिया अदा करती हूं. जो मुझे यहां समर्थन करने के लिए आए. मैं आप सभी की तहेदिल से शुक्रगुजार हूं. मेरे लिए यह महान पल है.’ मैरी विश्व चैम्पियनशिप में सबसे अधिक पदक भी जीतने वाली खिलाड़ी बन गई हैं. मैरीकॉम ने छह स्वर्ण और एक रजत जीत कर क्यूबा के फेलिक्स सेवोन की बराबरी कर ली है. फेलिक्स ने 1986 से 1999 के बीच छह स्वर्ण और एक रजत पदक जीता था.

Published by Yash Sharma on 26 Nov 2018

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