सर रमाकांत आचरेकर की वो सीख जिनसे सचिन तेंदुलकर कहलाए क्रिकेट के भगवान

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क्रिकेट जगत के द्रोणाचार्य और महान बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर के गुरु रह चुके गुरु रमाकांत आचरेकर अब इस दुनिया में नहीं हैं. सचिन की कामयाबी में उनका बड़ा हाथ रहा है. सचिन ने बचपन में रमाकांत से ही अपने क्रिकेट की बारीकियां सीखी थीं. बचपन में जब मास्टर ब्लास्टर ने अपने क्रिकेट के हुनर को निखारना शुरू किया था. तब उनके भाई अजीत तेंडुलकर ने ही शिवाजी पार्क में सचिन को आचरेकर से मिलवाया था. इसके बाद यहीं से गुरु-शिष्य ‘तेंडुलकर-आचरेकर’ की इस जोड़ी को दुनिया भर में ख्याति मिली.

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Rest In Peace #RamakantAchrekar Sir, pioneer in making careers of Tendulkar, Kambli, Amre and many more. ##Coach #Tendulkar #Amre #India #Sir #Respect

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सचिन के क्रिकेटिंग करियर की शुरुआत के दिनों में आचरेकर तेंडुलकर को प्रर्याप्त प्रैक्टिस के लिए मुंबई के अलग-अलग मैदानों पर लेकर जाते थे. जब सचिन बेहरतर परफॉर्म कर अपने गुरु को प्रभावित करते थे तो उन्हें अपने गुरु से ईनाम में वड़ा-पाव मिलता था. वैसे ही सचिन को रामकांत की तरफ से 20 सिक्के ईनाम में मिले थे जो उनके लिए आज भी बहुत ख़ास हैं.

एक इंटरव्यू में सचिन ने कहा था कि उन दिनों सर स्‍टंप पर एक सिक्‍का रख दिया करते थे, अगर मुझे कोई आउट न कर पाए तो वह सिक्‍का मेरा हो जाता था. मेरे लिए सबसे यादगार चीज वह सिक्के हैं, जो मैंने कोच से अपनी मेहनत के बल पर हासिल किए हैं. वह अतुलनीय हैं.

रमाकांत आचरेकर की कोचिंग में ही सचिन तेंडुलकर, विनोद कांबली, समीर दीघे, प्रवीण आमरे, चंद्रकांत पंडित और बलविंदर सिंह संधू जैसे कई दिग्गज क्रिकेटरों ने अपने खेल को निखारा.

2010 में उन्हें पद्म श्री से सम्मानित किया गया था. 1990 में उन्हें क्रिकेट कोचिंग की अपनी सेवाओं के लिए द्रोणाचार्य पुरस्कार से सम्मानित किया गया था. 12 फरवरी 2010 को उन्हें भारतीय क्रिकेट टीम के तत्कालीन कोच गैरी कर्स्टन द्वारा ‘लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड’ से सम्मानित किया गया था.

Published by Yash Sharma on 03 Jan 2019

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