130 साल के मगरमच्छ गंगाराम के जाने के बाद अब बनेगा उसका मंदिर, गांववालों से था अनूठा रिश्ता

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आपने अभी तक ज़ू में कई मगरमच्छों को देखा होगा. जिन्हें देखकर बेशक आपको डर ही लगा होगा. क्योंकि मगरमच्छ इंसानों को भी अपने भोजन के रूप में खा जाता है. सभी मगरमच्छ जीव जंतुओं का ही भोजन करते हैं या यूं कहें कि वे मांसाहारी होते हैं. लेकिन हम आपसे कहें कि एक मगरमच्छ दाल चावल खाता है तो क्या आप इस बात पर यकीन करेंगे? शायद नहीं लेकिन यह सच है. छत्तीसगढ़ के बेमेतरा के बावमोहरा गांव का एक मगरमच्छ जिसका नाम गंगाराम है वह दाल चावल खाता था. मंगलवार को सुबह ही गंगाराम इस दुनिया को छोड़ कर चला गया.

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बता दें गंगाराम की उम्र 130 साल थी. गंगाराम के जाने के बाद से पूरे गांव के लोगों की आंखों में आंसू थे. क्योंकि वह गांववालों के लिए एक जानवर नहीं बल्कि परिवार के सदस्य की तरह था. रिपोर्ट्स की मानें तो गांव के लोगों और गंगाराम के बीच बहुत खास रिश्ता था. गंगाराम गांव के तालाब में रहता था लेकिन उसने गांव के किसी भी इंसान को कभी भी कोई हानि नहीं पहुंचाई. जब भी कोई तालाब में नहाने के लिए जाता था तो गंगाराम वहां से दूसरी और चला जाता था. गांव के लोग भी उसे बहुत प्यार करते थे. उसे अपने घर का बना दाल चावल भी खिलाते थे. जब गंगाराम ने इस दुनिया से विदा ली उस दिन गांव के लोगों ने अपने घर चूल्हा तक नहीं जलाया.

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गंगाराम की मौत के बाद उप प्रभागीय अधिकारी (वन) आरके सिन्हा ने बताया कि गंगाराम की मौत प्राकृतिक कारणों से हुई है. ग्रामीणों की उपस्थिति में उसका पोस्टमार्टम कर शव को गांववालों को सौंप दिया गया, जिसके बाद करीब 500 लोगों ने गंगाराम पर फूल-माला चढ़ा, उसे अंतिम विदाई दी. वन अधिकारी ने आगे कहा कि 250 किलोग्राम वज़न और 3.40 मीटर लंबा गंगाराम पूर्ण विकसित नर मगरमच्छ था, जिसने कभी गांववालों को नुकसान नहीं पहुंचाया. इसके अलावा गांव के संरपंच का कहना है कि गंगाराम की मौत से आहत ग्रामीण उसके नाम का स्मारक बनाने की तैयारी कर रहे हैं और जल्द ही उसके नाम का मंदिर भी बनाया जाएगा, जहां लोग उसकी पूजा कर सकेंगे.

Published by Chanchala Verma on 12 Jan 2019

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