प्रयागराज कुम्भ में इस बार शामिल हुआ एक और अखाड़ा, देखने को मिल रहा भक्ति का अनूठा समागम

Get Daily Updates In Email

उत्तरप्रदेश के प्रयागराज में कुम्भ मेला शुरू हो चुका है. 15 जनवरी से शुरू हुए मेले में दुनियाभर के कई बाबा और साधु हिस्सा ले रहे हैं. इसमें कुल मिलकर 13 अखाड़े अभी तक हिस्सा लेते आए हैं लेकिन इस बार से एक और अखाड़े का नाम इसमें शामिल हुआ है. धर्म के प्रचार और प्रसार के लिए आदिशंकराचार्य ने चार पीठ की स्थापना की थी.

साथ ही इनकी रक्षा के लिए शैव, वैष्णव और उदासीन पंथ के संन्यासियों को मिलाकर 13 अखाड़ों का गठन किया गया. इन अखाड़ों में से महानिर्वाणी, निरंजनी, जूना, अटल, आवाहन, अग्नि और आनंद की स्थापना खुद शंकराचार्य ने की थी. कुंभ में अखाड़ों का विशेष महत्व होता है. अखाड़े शब्द की शुरुआत मुगलकाल के दौर से हुई. अखाड़ा साधुओं का वह दल होता है, जो शस्त्र विद्या में भी पारंगत रहता है. इस बार कुंभ में किन्नर अखाड़ा भी शामिल हो चुका है. इस अखाड़े की महामंडलेश्वर लक्ष्मीनारायण त्रिपाठी हैं.

कुंभ मेले में पहली बार ‘किन्नर अखाड़ा’ की भागीदारी हो रही है. इस अखाड़े के प्रमुख पुजारी इसे समाज में ट्रांसजेंडरों की समावेशिता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताते हैं. अखाड़े के लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी इसे ‘लिंग-भेद से परे अखाड़ा’ कहते हैं और कुंभ में इसका हिस्सा बनकर रोमांचित हैं.

उन्होंने कहा, ‘हमारे लिए यह भागीदारी मुख्यधारा के समाज में हमारी स्वीकृति को लेकर है. निर्माता हमारे भीतर है और एक बार जब हम मर जाते हैं हम उसके पास वापस चले जाएंगे. हमारे दरवाजे सभी के लिए खुले हैं. थर्ड जेंडर की स्वीकृति हमारे जैसे रूढ़िवादी समाज में उल्लेखनीय है.’

बता दें कि कुंभ मेले के दौरान सभी अखाड़े तीन शाही स्नानों में हिस्सा लेंगे. ये स्नान 15 जनवरी को मकर संक्रान्ति, 4 फरवरी को मौनी अमावस्या और 10 फरवरी को बसंत पंचमी पर होंगे. शाही स्नान के लिए संगम के पास घाट बनाया गया है. प्रत्येक अखाड़े को स्नान के लिए 45 मिनट का वक्त दिया जाएगा.

Published by Yash Sharma on 15 Jan 2019

Related Articles

Latest Articles