इंदौर बना सबसे स्वच्छ शहर, 100 एकड़ में फैले कचरे को किया रिसायकल, बनेगा गोल्फ कोर्स

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भारत में स्वच्छता को लेकर पीएम मोदी द्वारा छेड़ी गई मुहीम आज देशभर में व्यापक रूप ले चुकी है. इस मुहीम के अंतर्गत देश को स्वच्छता में आगे लाकर विकास के हित में काम करना मुख्य सूत्र रहा है. अभी तक के हुए परीक्षणों में देश के सबसे स्वच्छ शहरों में मध्यप्रदेश के इंदौर शहर ने ही बाजी मारी है.

इंदौर शहर के नगर निगम के प्रबन्धन से यह देश का सबसे स्वच्छ शहर बना है. साथ ही यहां के निगमायुक्त आशीष सिंह ने अपनी सूझबूझ से शहर के लाखों टन कचरे का बेहतरीन उपयोग कर एक मिसाल कायम की है. इन्होंने मात्र 6 महीने में अपने शहर से 13 लाख मीट्रिक टन वाले कचरे के पहाड़ को ख़त्म कर दिया है. अब वहां इंदौर नगर निगम एक गोल्फ़ कोर्स बनाने की तैयारी कर रहा है.

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देव गुराडिया का Dumpyard हुआ साफ़ , IMC को इसमें भी मिल गए फुल मार्क्स । क्या इंदौर फिर से बनेगा No 1. ? क्या है आपकी राय ? . . Indore soon to become 'zero landfill city' by the end of December 2018. Indore Municipal Corporation (IMC) has started pulling up their socks to clean up 10 lakh metric tonne of waste lying at trenching ground in Devguradia area. . . Indore has been named cleanest city as per Swachh Survekshan (2017-18). The corporation says they're all set for Swachh Survekshan 2019 . . 📷 Swachh Survekshan . . #indorehd #cityupdate #news #newsoftheday #newsupdate #imc #indoremunicipalcorporation #betterindia #iloveindore #indore #india #madhyapradesh #indorediaries #indorecity #incredibleindia #zerolandfill #nogarbage #swachchbharat #swachchsarvekshan #swachchsarvekshan2019 #cleanestcityofindia #cleanindore #greenindore

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आशीष सिंह ने यह काम बहुत ही सस्ते दाम और कम समय में कर के बताया है. जहां इस काम को करने में दो साल का वक्त और 60 करोड़ से ज्यादा का खर्च आ रहा था. वहीं आशीष ने यह काम महज 6 महीनों में और 10 करोड़ रुपए में कर के बताया है. दरअसल साल 2018 में इंदौर ने स्वच्छता सर्वेक्षण में देश का क्लीनस्ट शहर का ख़िताब हासिल किया था. लेकिन इंदौर के 100 एकड़ में फैले डंपिग यॉर्ड की बदबू और रह-रहकर उसमें लगने वाली आग से लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा था.

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उन्होंने रिसायकल तकनीक की सहायता से कचरे में मौजूद कंकड़-पत्थर, पॉलीथीन, रबड़, कपड़ा, मिट्टी, धातू जैसी चीज़ों को अलग कर रिसाइकिल कर लिया. पॉलीथीन और धातू को नगर निगम ने रिसाइकिल सेंटर में भेज दिया. साथ ही कंकड़ और पत्थर से शहर की कंस्ट्रक्शन साइट और गड्ढों को भरने में इस्तेमाल किया गया. बाकी बची मिट्टी को इसी डंपिंग यार्ड में छोड़ दिया.

अब यह डंपिंग यार्ड एक मैदान की तरह नज़र आता है. जिसमें नगर निगम पेड़-पौधे लगा रही है. आज के हिसाब से इस ज़मीन की कीमत 400 करोड़ रुपए है. रिसाइकिल की गई धातू से इन्होंने यहां एक स्टैच्यू भी लगवाया है. जल्द ही इसे एक गोल्फ़ कोर्स में तब्दील करने के लिए नगर निगम सुचारू रूप से कार्यरत है.

Published by Yash Sharma on 17 Jan 2019

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