कुम्भ के मेले में अगर खो जायें बच्चे, तो सत्यार्थी की संस्था से करें सम्पर्क

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प्रयागराज कुम्भ मेला 2019 का शुभारम्भ मकरसक्रांति के अवसर पर हुआ. इसमें दुनियाभर के कई साधु-महात्मा हिस्सा लेने आ रहे हैं. साथ ही लोगों का जमावड़ा लगाना शुरू हो चुका है. 4 मार्च यानी महाशिवरात्रि तक चलने वाले इस मेले में लाखों-करोड़ों श्रद्धालुओं के आने की उम्मीद की जा रही है. साथ ही इतनी भीड़ को देखते हुए यहां पर सुरक्षा के बहुत कड़े प्रबंध किए गए हैं.

यूपी पुलिस जहां कुंभ में परिजनों के साथ आने वाले 14 साल से कम उम्र के सभी बच्‍चों को ‘रेडियो फ्रीक्वेंसी पहचान’ (RFID) टैग लगाएगी. वहीं भीड़ में अपने से बिछड़ने वाले बच्‍चों को ढूंढ़ने में बाल अधिकार कार्यकर्ता कैलाश सत्यार्थी की संस्था भी प्रशासन को मदद देगी. RFID टैग की वजह से भीड़ में खोने वाले बच्चों का पता लगाया जा सकेगा. यूपी पुलिस ने इसके लिए एक टेलीफोन कंपनी से हाथ मिलाया है.

पुलिस ने मेले में आने वाले बच्‍चों के लिए 40 हजार आरएफआईडी बनाने की बात कही है. बता दें यह एक तरह का वायरलेस संचार माध्यम है. इसमें इलेक्ट्रो मैग्नेटिक या इलेक्ट्रोस्टैटिक कफलिंग का इस्तेमाल होता है. जिससे किसी भी व्यक्ति या वस्तु की पहचान में मदद ली जा सकती है. वहीं दूसरी ओर नोबेल पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी की संस्था ‘कैलाश सत्यार्थी चिल्ड्रेंस फाउंडेशन’ ने भी मेले में खोने वाले बच्‍चों की तलाश के लिए पूरे मेला क्षेत्र में अपने स्वयंसेवियों को तैनात करने की बात कही है.

कैलाश सत्यार्थी चिल्ड्रेंस फाउंडेशन की ओर से इस संबंध में जारी एक बयान में कहा गया है कि, ‘कुंभ में ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चे भी बड़ी संख्या में आते हैं और इन बच्चों पर मानव तस्करी से जुड़े समूहों की नजर रहती है. ऐसे में हम खोने वाले बच्चों को ढूंढने की मदद के लिए अपने स्वयंसेवी तैनात करेंगे.’

बता दें मेले में आने वाले बच्चों और अन्‍य लोगों के बिछड़ने की स्थिति में उनका पता लगाने के लिए कई जगहों पर खोया-पाया केंद्र भी बनाए गए हैं. पूरे मेला क्षेत्र में ऐसे 15 आधुनिक एकीकृत डिजिटल खोया-पाया केंद्र बनाए गए हैं. जहां से संपर्क किया जा सकता है.

Published by Yash Sharma on 17 Jan 2019

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