अपने जीवनकाल में विश्वेश्वर दत्त ने लगाए 50 लाख से ज्यादा पेड़, लोगों ने नाम दिया था वृक्ष मानव

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पर्यावरण को बचाने के लिए हमें जितना हो सके उतने पेड़ लगाने चाहिए….. यह बात तो हम सभी जानते ही हैं लेकिन हममें से बहुत कम ही ऐसे लोग होंगे जो कि वृक्षारोपण जैसा काम करते हैं. लेकिन इस दुनिया में कुछ ऐसे भले लोग भी हैं जो कि अपनी आने वाली पीढ़ी की चिंता करते हैं और वृक्षारोपण जैसा भला काम करते हैं. यहां हम आपको ऐसे ही एक शख्स के बारे में बताने जा रहे हैं जिन्हें लोग ‘वृक्ष मानव’ के नाम से जानते हैं.

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‘वृक्ष मानव’ के नाम से जाने जाने वाले इन शख्स का असली नाम है विश्वेश्वर दत्त. जो कि उत्तराखंड के टिहरी जिले में रहते थे. 18 जनवरी को ही विश्वेश्वर ने 96 साल की उम्र में अपने पैतृक गांव सकलाना पट्टी में आखिरी सांसे ली थी.

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8 साल की उम्र से ही विश्वेश्वर स्वतंत्रता संग्राम से जुड़ गए थे. उन्हें पेड़ पौधे बहुत पसंद थे. इसलिए वे पौधा रोपण करते थे और कुछ समय बाद उन्होंने इसे ही अपना लक्ष्य बना लिया. जिसकी शुरुआत उन्होंने अपने इलाके से ही की थी. उस समय उनके गांव सकलाना में काफी कम पेड़ थे. जिसके बाद उन्होंने वहां बांज, बुरांश, देवदार के अलावा कई सारे पेड़ लगाए. 1000 हेक्टेयर की जमीन में उन्होंने एक जंगल खुद से तैयार किया था. अनुमान के हिसाब से बताया जाता है कि दत्त साहब ने अपने जीवनकाल में 50 लाख से ज्यादा पेड़-पौधे लगाए. जिसके लिए उन्हें राजीव गांधी ने साल 1986 में ‘इंदिरा प्रियदर्शिनी पुरस्कार’ से नवाजा था.

Gepostet von पेड़ो के मसीहा वृक्ष मानव वी डी सकलानी am Mittwoch, 22. April 2015

इस तरह का नेक काम करने वालों लोगों में से कुछ ही लोगों को अपने घरवालों का सपोर्ट मिल पाता है लेकिन इस मामले में दत्त साहब काफी किस्मतवाले निकले क्योंकि उनकी पत्नी भगवती देवी ने भी उनका इस काम को करने में हमेशा सहयोग दिया. यही नहीं उनके साथ मिलकर इस काम को पूरा भी किया. एक इंटरव्यू में दत्त साहब को लेकर उनकी पत्नी भगवती देवी ने कहा था, ‘पेड़ उनके लिए सबकुछ थे, उनका परिवार, उनके माता-पिता, उनके दोस्त, उनकी दुनिया. उन्होंने दुनिया नहीं देखी क्योंकि वो मानते थे कि पेड़ ही उनकी दुनिया है.’

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विश्वेश्वर दत्त जैसे लोगों का देश, समाज और आने वाली पीढ़ी के बारे में सोचकर यह साहसिक काम करना सचमुच प्रेरणादायी है. हमारे समाज को ऐसे लोगों की सचमुच बहुत जरूरत है जो कि वृक्षारोपण जैसे काम को कर सकें और लोगों को ऐसा काम करने के लिए प्रेरित करें.

Published by Chanchala Verma on 20 Jan 2019

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