जब सत्य हो गए थे खुद के कहे शब्द और अंतरिक्ष में ही विलीन हो गईं कल्पना चावला

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देश की पहली महिला अंतरिक्ष यात्री कल्पना चावला ने ना सिर्फ अंतरिक्ष की दुनिया में उपलब्धियां हासिल की. बल्कि तमाम छात्र-छात्राओं को सपने जीना सिखाया. भले ही 1 फरवरी 2003 को कोलंबिया स्पेस शटल के दुर्घटनाग्रस्त होने के साथ कल्‍पना की उड़ान रुक गई लेकिन आज भी वह दुनिया के लिए एक मिसाल हैं. उनके वह शब्द सत्य हो गए जिसमें उन्होंने कहा था कि ‘मैं अंतरिक्ष के लिए ही बनी हूं’.

हरियाणा के करनाल में जन्मी कल्पना ने चंडीगढ़ के छात्रों के लिए एक संदेश भी भेजा था. संदेश में उन्होंने कहा था, ‘सपनों को सफलता में बदला जा सकता है. इसके लिए आवश्यक है कि आपके पास दूरदृष्टि, साहस और लगातार प्रयास करने की लगन हो. आप सभी को जीवन में ऊंची उड़ान के लिए शुभकामनाएं’.

इतना ही नहीं कल्पना ने अपने कॉलेज के दिनों में कराटे सीखा. उन्होंने बैडमिंटन भी खेला और दौड़ों में भाग लिया. अपने सपनों की उड़ान भरने के लिए वह 1982 में अमेरिका गईं और यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्सस से एयरोस्पेस इंजिनियरिंग में मास्टर्स डिग्री ली. उनके पास सीप्लेन, मल्टि इंजन एयर प्लेन और ग्लाइडर के लिए कमर्शल पायलट लाइसेंस था. वह ग्लाइडर और एयरप्लेंस के लिए भी सर्टिफाइड फ्लाइट इंस्ट्रक्टर भी थीं.

कल्पना को मार्च 1995 में नासा के अंतरिक्ष यात्री कोर टीम में शामिल किया गया और उन्हें 1997 में अपनी पहली अंतरिक्ष उड़ान के लिए चुना गया. 1997 में अपनी पहली यात्रा के दौरान कल्पना ने अंतरिक्ष में 372 घंटे बिताये थे. वहीं कल्पना की दूसरी अंतरिक्ष यात्रा 16 जनवरी 2003 से शुरू हुई थी. कल्‍पना चावला हमेशा युवाओं से सपने को साकार करने की बात पर जोर देती रहीं.

उन्‍होंने कहा था कि, ‘अगर आपके पास कोई सपना है तो उसको साकार करने का प्रयास करो. इस बात से जारा सा भी फर्क नहीं पड़ता कि आप एक औरत हैं. भारत से हैं या फिर कहीं और से. आप जब तारों और आकाशगंगाओं को देखते हैं तो ऐसा लगता है कि आपका अस्‍तित्‍व किसी विशेष भूमि के कारण नहीं बल्‍की सौर मंडल के कारण है’. कल्पना चावला ने एक सम्बोधन में कहा था कि मैं हमेशा से ही अंतरिक्ष यात्री बनना चाहती थी, मुझे लगता है कि मैं अंतरिक्ष के लिए ही बनी हूं. कल्पना की यह बात सच ही साबित हुई और सबके लिए मिसाल बनी कल्पना चावला अपनी अंतरिक्ष यात्रा के दौरान अंतरिक्ष में ही हमेशा के लिए विलीन हो गईं.

Published by Yash Sharma on 01 Feb 2019

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