सबसे ऊंचे एवरेस्ट पर तो कर ली चढ़ाई, लेकिन कैलाश पर्वत पर आज तक कोई क्यों नहीं चढ़ सका

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हिंदू धर्म में कैलाश मानसरोवर यात्रा का बेहद खास महत्व है. कैलाश मानसरोवर को भगवान शिव का निवास स्थल माना जाता है. इसके अलावा कैलाश पर्वत दुनिया का सबसे अद्भुत पर्वत माना जाता है. बता दें कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए कोई भी श्रद्धालु दूर से ही कैलाश पर्वत के दर्शन कर लौटते हैं.

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कई लोग एवरेस्ट की चोटी पर चढ़ चुके हैं लेकिन कैलाश पर जाने का साहस कोई नहीं कर सका है. यदि एवरेस्ट की चोटी के मुकाबले कैलाश मानसरोवर को देखा जाए तो इसकी ऊंचाई 6600 मीटर से अधिक है. जो कि दुनिया के सबसे ऊंचे माउंट एवरेस्ट से लगभग 2200 मीटर कम है. लेकिन फिर भी आज तक कोई कैलाश मानसरोवर पर नही चढ़ पाया है.

बता दें कैलाश पर्वत और कैलाश क्षेत्र पर दुनियाभर के वैज्ञानिकों ने रिसर्च की है. इस पर रिसर्च करने वाले ह्यूरतलीज ने कैलाश पर्वत पर चढ़ने को असंभव बताया है. इसके अलावा एक दूसरे पर्वतारोही कर्नल आर.सी. विल्सन ने बताया कि, ‘जैसे ही मुझे लगा कि मैं एक सीधे रास्ते से कैलाश पर्वत के शिखर पर चढ़ सकता हूं. तभी भयानक बर्फबारी ने रास्ता रोक दिया और चढ़ाई को असंभव बना दिया.’

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बता दें कैलाश पर्वत पर चढ़ने की आखिरी कोशिश लगभग 17 साल पहले साल 2001 में की गई थी. जब चीन ने स्पेन की एक टीम को कैलाश पर्वत पर चढ़ने की अनुमति दी थी. लेकिन दुनियाभर के लोगों को मानना है कि कैलाश पर्वत एक पवित्र स्थान है. इसलिए इस पर किसी को भी चढ़ाई नहीं करने देना चाहिए. जिसके बाद से कैलाश पर्वत की चढ़ाई पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई.

बता दें कैलाश पर्वत का महत्व इसकी ऊंचाई की वजह से नहीं बल्कि इसके विशेष आकार की वजह से है. माना जाता है कि कैलाश पर्वत आकार चौमुखी दिशा बताने वाले कम्पास की तरह है. माना जाता है कि जब कैलाश पर्वत की बर्फ पिघलती है तो पूरे क्षेत्र में डमरू की आवाज सुनाई देती है. धार्मिक मतों के अनुसार माना जाता है कि कैलाश पर्वत पर साक्षात भगवान शिव मौजूद हैं. कहा जाता है कि कैलाश पर्वत 6 पर्वत श्रंखलाओं के बीच कमल के फूल जैसा दिखता है.

Published by Yash Sharma on 04 Feb 2019

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