75 साल का हो चुका है हावड़ा ब्रिज मगर अब तक नहीं हुआ उद्घाटन, ब्रिज से जुड़े हैं कई अनसुने किस्से

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‘हावड़ा ब्रिज’ देश की ऐतिहासिक चीजों में से एक है. यह ब्रिज भारत के साथ ही पूरे विश्व में फेमस है. यह ब्रिज कोलकाता और हावड़ा को जोड़ता है. चलिए आज हम आपको बताते हैं इस ब्रिज से जुड़ी कुछ खास बातें जो कि शायद ही आप जानते होंगे –

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साल 1942 यानि द्वितीय विश्वयुद्ध का गवाह यह ब्रिज है. उस समय जापान से एक बम आकर इस ब्रिज के पास गिरा था. इस पुल की तरह ही संसार में सिर्फ कुछ ही पुल हैं. करीबन 75 सालों से यह पुल कोलकाता की पहचान बना हुआ है.

चलिए अब आपको बताते हैं इस ब्रिज को बनाने की वजह क्या थी 

उन्नीसवीं सदी के आखिरी समय में ब्रिटिश इंडिया सरकार ने कोलकाता और हावड़ा को जोड़ने के लिए उसके बीच बहने वाली हुगली नदी पर तैरते हुए एक पुल बनाने की योजना बनाई क्योंकि उस समय नदी से जहाजों का आना जाना होता था और उसमें रुकावट ना हो इसलिए इस तैरने वाले पूल की योजना बनाई गई. जिसके लिए साल 1871 में हावड़ा ब्रिज एक्ट पास किया गया. लेकिन इसे लागू होने में काफी समय लग गया.

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जिसके बाद साल 1937 में इस पुल  को बनाने की शुरुआत हुई और साल 1942 में यह ब्रिज तैयार हो गया और एक साल बाद इसे आम लोगों के लिए खोला गया. हावड़ा ब्रिज का अब तक का सबसे यादगार नजारा उस समय बना जब 4 फ़रवरी 1948 को हावड़ा पुल के पास हजारों की संख्या में लोग महात्मा गांधी को श्रद्धा सुमन अर्पित करने के लिए यहां थे.

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बिना उट्घाटन के ही शुरू हुआ था ब्रिज –

यह पढ़कर आपको जरूर हैरानी हुई होगी लेकिन यह सच है. यह दुनिया का इकलौता ब्रिज है जिसका अभी तक उद्घाटन नहीं हो पाया है. इसका कारण यह है कि जब यह ब्रिज बनकर तैयार हुआ उस समय द्वितीय विश्व युद्ध चल रहा था. जिस वजह से इसका उट्घाटन नहीं हो पाया. इस ब्रिज ने द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान हुई बमबारी, स्वाधीनता आंदोलन के साथ ही बंगाल के भयावह अकाल को भी देखा है.

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जब यह ब्रिज बना था तब इसका नाम ‘न्यू हावड़ा ब्रिज़’ रखा गया था. जिसके बाद 14 जून 1965 को गुरु रवींद्रनाथ टैगोर के नाम पर इसका नाम ‘रवींद्र सेतु’ कर दिया गया, लेकिन अभी भी यह हावड़ा ब्रिज़ के नाम से ही जाना जाता है.

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ये हैं हावड़ा ब्रिज की कुछ खासियत –

इसकी लंबाई 1528 फ़ीट और चौड़ाई 62 फ़ीट है. इसे बनाने में ढाई करोड़ रुपए ख़र्च हुआ था. इसे बनाने में 26. 5 हज़ार टन स्टील इस्तेमाल किया गया था. यह दुनिया का अपनी तरह का तीसरा सबसे लंबा ब्रिज़ था.

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3 फ़रवरी 2019 को इस ब्रिज को बने 75 साल हो चुके हैं.

Published by Chanchala Verma on 04 Feb 2019

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