गीता-बबीता के बाद सामने आई एक और दंगल गर्ल्स की जोड़ी, पिता ने घर में ही बनाया प्रैक्टिस अखाड़ा

Get Daily Updates In Email

साल 2016 में आई आमिर खान की फिल्म ‘दंगल’ तो हम सभी ने देखी है. इस फिल्म की कहानी बहुत ही इंस्पिरेशनल है. इस फिल्म में पिता-बेटी और बहनों के बीच का प्यार नजर आता है. यहां हम आपको ऐसी ही दो बहनों की कहानी बताने जा रहे हैं. हम बात कर रहे हैं बेगूसराय, बिहार की रहने वाली दो बहनों शालिनी और निर्जला के बारे में जिन्होंने राष्ट्रीय कुश्ती प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीता है.

Courtesy

खास बात तो यह है कि शालिनी और निर्जला के पिता मुकेश ने ‘दंगल’ फिल्म देखने के बाद अपनी बेटियों के लिए घर में ही अखाड़ा बना दिया. जिसके बाद अपनी 14 साल की बेटी शालिनी और 13 साल की बेटी निर्जला को पहलवान बनाने की तैयारी शुरू कर दी. ‘दंगल’ फिल्म के फेमस डायलॉग ‘म्हारी छोरियां छोरों से कम हैं के…’ ने मुकेश पर कुछ इस कदर का असर डाला ने घर में अखाड़ा बनाने के साथ ही खुद कोच बनकर उन्हें कुश्ती की प्रेक्टिस करवानी शुरू कर दी. जिसकी वजह से उनकी बेटियां आज इस मुकाम पक़र पहुंचकर उनके साथ देश का नाम भी रोशन कर रही हैं.

Courtesy

बता दें पिछले साल अक्टूबर के महीने में शालिनी ने हरियाणा के सोनीपत और उनकी बहन निर्जला ने उत्तरप्रदेश के मेरठ में आयोजित हुई राष्ट्रिय कुश्ती की प्रतियोगिता में गोल्ड हासिल किया था. जिसके बाद और अच्छे प्रशिक्षण के लिए मुकेश ने अपनी बेटियों को उत्तरप्रदेश के गोंडा स्थित नंदिनी नगर महाविद्यालय के कुश्ती प्रशिक्षण केंद्र भेजा है. जहां दोनों कुश्ती संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष सह सांसद बृज भूषण शरण सिंह, डॉ. रजनीश पांडे व प्रेमचंद यादव से कुश्ती का बेहतर प्रशिक्षण ले रही हैं.

Courtesy

बता दें गीता और बबीता फोगाट को आदर्श मानकर शालिनी और निर्जला ने भी मेहनत और लगन के साथ प्रैक्टिस करना शुरू किया और अब दोनों बहनें राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में गांव, जिले के साथ देश का नाम रोशन कर रही हैं. शालिनी और निर्जला बताती हैं कि पिता की इच्छा को जुनून बनाकर वे तीन वर्ष से मेहनत कर रही हैं. बेटियों को कुश्ती में आने के सफर के बारे में मुकेश बताते हैं कि बेटियों को पहलवान बनाने का सफर आसान नहीं था. जिले के सीमावर्ती और अति पिछड़े क्षेत्र में सामाजिक बेड़ियां पग-पग पर बाधक बनती रहीं, लेकिन उसकी परवाह न करते हुए मेहनत करता रहा. अब मेहनत ने रंग दिखाना शुरू कर दिया है.’

वहीं मां पूनम देवी बताती हैं कि, ‘अगल-बगल वाले ताने देते हैं कि बेटी को पहलवान बना दिया, अब उनकी शादी कैसे करोगी? लेकिन मैं इसकी चिंता न करते हुए चाहती हूं कि मेरी बेटियां राज्य और देश का नाम रोशन करें.’

Published by Chanchala Verma on 06 Feb 2019

Related Articles

Latest Articles