5 साल की उम्र में ही वीणा बजाना सीख गए थे शंकर महादेवन, बिना रुके एक सांस में गा चुके हैं गाना

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‘दिलबरो’,’गल्लां गूड़ियां’ और ‘इंडिया वाले’ जैसे सुपरहिट गानों में अपनी आवाज देने वाले बॉलीवुड के फेमस सिंगर शंकर महादेवन को आज कौन नहीं जानता हैं. शंकर महादेवन एक अच्छे सिंगर ही नहीं बल्कि एक बेहतर म्यूजिक कंपोजर भी हैं.

बॉलीवुड की कई सुपरहिट फिल्मों में अपनी आवाज देने वाले शंकर ने हाल ही में अपना 52 वां बर्थडे सेलिब्रेट किया है. तो चलिए इस खास मौके पर आपके साथ शेयर करत हैं उनसे जुड़ी कुछ खास बातें जो शायद ही अभी तक आपको पता होगी.

3 मार्च 1967 में मुंबई के चेम्बूर में जन्म लेने वाले शंकर को बचपन से ही संगीत का शौक था. महज पांच साल की उम्र में शंकर वीणा बजाने माहिर हो गए थे. शंकर ने कर्नाटिक संगीत और भारतीय संगीत की शिक्षा ली है. शंकर ने हिंदी ही नहीं बल्कि पांच से ज्यादा भाषों में गाना गाए हैं. मुख्य रूप से इन्होंने हिंदी, तेलुगु, तमिल, मलयालम, मराठी और कन्नड़ भाषा में भी गीत गाए हैं.

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शंकर का पहला एल्बम ब्रीथलेस था. इस एल्बम के एक गाने को शंकर ने बिना सांस रोके गाया था जो काफी फेमस हुआ था. इस गाने के बाद शंकर को हर कोई जानने लगा था. तमिल मूवी कांदोकंदनीं-कांदोकंदनीं के लिए शंकर को पहला नेशनल पुरुस्कार मिला था. दूरदर्शन पर आने वाले ‘स्कूल चले हम’ गीत का निर्देशन भी शंकर महादेव ने किया था.

शंकर का एक म्यूजिशियन ग्रुप भी है. इस ग्रुप का नाम शंकर-एहसान-लॉय है. शंकर के इस ग्रुप ने कई फिल्मों के गानों में अपना म्यूजिक दिया है.

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आपको जानकारी हैरानी होगी कि शंकर महादेवन को 3 बार बेस्ट मेल प्लेबैक सिंगर का पुरुस्कार मिल चुका है. इसके अलावा उन्हें चार बार बेस्ट म्यूजिक डायरेक्टर का भी राष्ट्रीय पुरूस्कार भी मिल चुका है. शंकर महादेवन 2009 में जीटीवी के शो सारे-गा-मा-पा चैलेंज में जज की भूमिका भी अदा कर चुके हैं.

पारिवारिक जिन्दगी की बात करें तो बता दें कि शंकर महादेवन ने संगीता महादेवन से शादी की है. इस कपल के अब दो बेटे भी हैं. छोटे बेटे का नाम सिद्धार्थ और बड़े बेटे का नाम शिवम महादेवन है. जानकारी के लिए आपको बता दें कि साल 2011 में शंकर ने ऑनलाइन अकेडमी की शुरुआत की थी. उनकी यह अकेडमी विश्वभर के छात्रों को संगीत की शिक्षा देती है.

Published by Lakhan Sen on 04 Mar 2019

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