50 साल की उम्र में विश्व की 7 सबसे ऊंची चोटियों को फतह कर चुकी हैं प्रेमलता अग्रवाल

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50 की उम्र तक आते आते हम में से कोई तीर्थ यात्रा करने का विचार करने लगता है लेकिन कुछ लोग ऐसे भी हैं जो कि इस उम्र में आकर भी ऐसे काम कर जाते हैं जिन्हें देखकर हम उनके साहस की तारीफ किए बिना नहीं रह सकते. यहां हम आपको ऐसी ही एक 56 साल की महिला के बारे में बताने जा रहे हैं जिनके द्वारा किए गए काम को जानकर आप भी हैरान रह जाएंगे.

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जी हां, हम बात कर रहे हैं 56 वर्षीय प्रेमलता अग्रवाल की. जिन्होंने अपनी उम्र को नजरअंदाज कर विश्व की सभी सात सबसे ऊंची चोटियों को फतह उपलब्धि हासिल की है. आपने सही पढ़ा….प्रेमलता के इस प्रेरणास्पद काम के लिए उन्हें साल 2013 में तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने पद्मश्री पुरस्कार से भी सम्मानित किया था. यह भी बता दें कि प्रेमलता दो बच्चों की मां हैं. जिनमें से एक बेटी की शादी हो चुकी है. प्रेमलता सातों शीर्ष चोटियां फ़तह करने वाली पहली भारतीय महिला हैं. बता दें 48 वर्ष की उम्र में माउंट एवरेस्ट को फतह करने का रिकॉर्ड प्रेमलता के नाम दर्ज है. उन्हें साल 2017 में तेनजिंग नॉर्गे नेशनल एडवेंचर अवॉर्ड से भी सम्मानित किया जा चुका है.

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इन सभी के अलावा प्रेमलता थार रेगिस्तान में ऊंट पर बैठकर 2,000 किलोमीटर का सफर तय कर चुकी हैं. जिसके लिए उन्हें ‘लिम्का बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड’ से भी सम्मानित किया जा चुका है.

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अपने बारे में प्रेमलता बताती हैं उनका जन्म दार्जिलिंग में हुआ था. लेकिन शादी के बाद बच्चों के साथ वह झारखंड के जमशेदपुर में रह रही थीं. एक दिन वह अपनी छोटी बेटी को लेकर स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स गईं तो वहां उन्हें टाटा स्टील एडवेंचर फाउंडेशन द्वारा आयोजित किए जाने वाले एक ट्रेकिंग कार्यक्रम के बारे में पता चला. उस पोस्टर को देखकर प्रेमलता के मन में भी उसमें हिस्सा लेने का ख्याल आया. जिसके बाद उन्होंने इसमें हिस्सा लिया और 500 लोगों के बीच तीसरा स्थान हासिल किया.

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इसके बाद मशहूर पर्वतारोही बछेंद्री पाल ने प्रेमलता को गाइड किया. इस समय वह 37 साल की थीं. 23 मई 2013 को 50 वर्ष की उम्र में उत्तरी अमेरिका के अलास्का के माउंट मैकेनले को फतह करके उन्होंने नई उपलब्धि हासिल की थी. इस शिखर पर चढ़ने वाले प्रेमलता पहली भारतीय महिला हैं.

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इन सभी के साथ प्रेमलता एक अच्छी गृहिणी भी हैं. प्रेमलता अग्रवाल नेपाल की एशियन ट्रेकिंग कंपनी की देख रेख में मार्च के अंत में शुरू हुए इको एवरेस्ट अभियान 2011 के 22 सदस्यीय अंतर्राष्ट्रीय दल का हिस्सा भी रह चुकी हैं. यही नहीं उन्होंने दार्जिलिंग से पर्वतारोहण की शिक्षा भी ली है.

Published by Chanchala Verma on 16 Mar 2019

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