हिन्दू नववर्ष : अंतरिक्ष में परचम लहराने से पुरातन सभ्यता को संजोने तक हर जगह आगे हैं भारतीय

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हिन्दू धर्म जो भारत के कण-कण में है उसकी खुशबू भारत में रहने वाले हर वर्ग-धर्म समुदाय विद्यमान में है. दरअसल हिन्दू सिर्फ एक धर्म नहीं है ये उस पुरातन सभ्यता का नाम है जिसकी मिट्टी में हर धर्म और वर्ग के लोग शामिल होते चले गए और यह एक वृहद स्वरूप में पनपता गया. हालांकि कालांतर में पश्चात्य संस्कृति युवाओं पर हावी होती रही लेकिन एक बार फिर देश अपनी सभ्यता की गहराई को समझ कर उसे सहेजने के लिए आगे बढ़ रहा है. यही वजह रही कि आज भारत में जितने हर्षोल्लास से न्यू ईयर 1 जनवरी को मनाया जाता है उसी हर्षोल्लास से हिन्दू नववर्ष भी मनाया जा रहा है, बस फर्क इतना है कि अंग्रेजी नववर्ष का हर्षोल्लास केवल शराब व अन्य बुरी चीजों तक ही सीमित है जबकि भारतीय नववर्ष में वैज्ञानिकता, धर्म और संस्कृति का वास है जो हमें सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करती है. आज जहां भारतवर्ष अंतरिक्ष और विज्ञान में अपना परचम लहरा रहा है वहीं पुरातन सभ्यता को भी अपने में समाए हुए है.

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इस दिन को समूचे भारत में बड़ी ही धूमधाम से मनाया जाता है. हर साल नववर्ष को देश में किसी भी अन्य बड़े पर्व की तरह ही मनाया जाता है. यही वजह है कि हिन्दू धर्म में शुभ कामों की भी शुरुआत को गुड़ी पड़वा का दिन श्रेष्ठ माना गया है. पौराणिक कथाओं के अनुसार चैत्र मास की शुक्ल प्रतिपदा के दिन ही भगवान ब्रह्ना ने सृष्टि की रचना की शुरुआत की थी, जिसके चलते हिन्दू इस दिन नया साल मनाते हैं.

पूरे देश में अलग-अलग तरह से मनता है नया साल:

देश के उत्तर में हिन्दू नववर्ष को नवरात्री के रूप में माना जाता है और सेलिब्रेशन किया जाता है. इस दिन से नौ दिनों तक मां दुर्गा के अलग-अलग रूपों की पूजा की जाती है. 9 दिनों तक लोग माता के व्रत भी रखते हैं.

वहीं महाराष्ट्र में इस दिन को लेकर कहा जाता है कि इस दिन शालिवाहन नामक कुम्हार ने मिट्टी के सैनिकों की सेना की मदद से शत्रुओं पर विजय हासिल की थी. इसके चलते महाराष्ट्र में सभी लोग अपने घरों में गुड़ी यानि विजय पताका सजाते हैं.

दक्षिण की बात करें तो कहा जाता है कि इस दिन भगवान राम ने बालि का वध किया था और दक्षिण भारत के लोगों को उसके आतंक से मुक्ति दी थी. इसलिए यहां भी विजय पताका को फहराया जाता है.

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फिर धूमधाम से देश में मनाया जा रहा है हिन्दू नववर्ष :

जिस तरह से हम सभी 1 जनवरी को नववर्ष को उत्साह से मानते हैं उसी तरह बीते कुछ समय से हिन्दू नववर्ष को भी भारत में महत्ता दी जा रही है. देखने को मिल रहा है कि पूरा देश इस दिन साथ होकर नववर्ष के उल्लास में नजर आता है. इस दिन घरों में पूजा की जाती है और साथ ही धूमधाम से शुभ कार्यों की भी शुरुआत हो जाती है.

हिन्दू नववर्ष को मनाने के लिए हर साल बुजुर्गों से लेकर युवा और बच्चों तक सभी अपनी उपस्थिति दर्ज करवा रहे हैं. देखने को मिलने लगा है कि लोग 1 जनवरी की तरह ही इस दिन को भी सेलिब्रेट करने से पीछे नही हट रहे हैं. यह दिन युवाओं में हिन्दू सभ्यता की तरफ बढ़ते हुए क़दमों को दर्शाता है. और लोगों को इस सभ्यता की ओर बढ़ने के लिए प्रेरित भी करता है.

Published by Hitesh Songara on 05 Apr 2019

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