बर्थडे: पद्मश्री के अलावा अंतराष्ट्रीय पुरस्कार जीतने वाली पहली अभिनेत्री थीं सुचित्रा सेन

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हिंदी सिनेमा में गिनी चुनी फिल्में कर अपनी अदाकारी के झंडे गाड़ने वाली अभिनेत्री सुचित्रा सेन की आज बर्थ एनिवर्सरी है. सुचित्रा सेन का असली नाम रोमा दासगुप्ता है. उनका जन्म आज ही के दिन 1931 में पवना में हुआ था. सुचित्रा सेन एक ऐसी एक्ट्रेस हैं जिन्होंने देश ही नहीं बल्कि विदेशों में भी अपनी एक्टिंग की छाप छोड़ी है.

सुचित्रा सेन की स्कूलिंग पवना से ही हुई है. इसके बाद आगे की पढ़ाई के लिए वह इंग्लैंड चली गईं. जहां से इन्होंने समरविले कॉलेज, ऑक्सफोर्ड से अपना ग्रेजुएशन किया. ग्रेजुएशन करने के बाद 1947 में इनकी शादी बंगाल के मशहूर बिजनेसमैन आदिनाथ सेन के बेटे दीबानाथ सेन से हुई.

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Ei sundar swarnali sandhay, eki bondhone jorale go bondhu.." Tributes to the luminous superstar of Indian cinema, actress per excellence "Mahanayika" Suchitra Sen on her birth anniversary. Beauty unparalleled, stardom unmatched, the gorgeous reclusive Pole star. Her contribution to the Indian cinema is forever etched in the pages of history— there will never be another Mrs Sen quite like her. <3 #RIP #suchitrasen #uttamkumar #kolkata #bollywood #tollywood #tollywoodmovie #bengali #bong #bonghits #bongo #bonggirl #bongwoman #bongculture #mahanayika #beauty #cinema #stardom #gorgeous #indiancinema #bengalicinema #satyajitray #history #bengalisong #bengaliactress #bengalibeauty #bengaliliterature #bonglovers #mumbai #westbengal

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फिल्म जगत में सुचित्रा ने 1952 में कदम रखा. इनकी पहली बांग्ला फिल्म ‘शेष कोथा’ थी, जो रिलीज नहीं हो सकी. इसके बाद 1952 इन्होंने बांग्ला फिल्म ‘सारे चतुर’ की, जिसमें इनके अपोजिट उत्तम कुमार थे. इसके बाद 1963 में सुचित्रा सेन ने अपनी सुपरहिट फिल्म ‘सात पाके बांधा’ दी. जिसके लिए उन्हें मास्को फिल्म फेस्टिवल में सर्वश्रेष्ठ फिल्म एक्ट्रेस का अवॉर्ड मिला. भारतीय फिल्म इंडस्ट्रीज का ये पहला मौका था. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर किसी भारतीय एक्ट्रेस को अवॉर्ड मिला हो.

साल 1962 में ‘बिपाशा’ में काम करने के लिए उन्हें एक लाख रुपए मिले थे जब कि हीरो उत्तम कुमार को सिर्फ अस्सी हजार रुपए से संतोष करना पड़ा था. साल 1955 में रिलीज हुई ‘देवदास’ में सुचित्रा सेन ने पारो की भूमिका में जान भर दी. वहीं सुचित्रा सेन 1975 में रिलीज हुई फिल्म ‘आंधी’ से अपनी एक अलग छाप छोड़ी.

सुचित्रा सेन आखिरी बार साल 1978 में प्रदर्शित बांग्ला फिल्म ‘प्रणोय पाश’ में दिखीं. इस फिल्म के बाद उन्होंने इंडस्ट्री से सन्यास ले लिया और रामकृष्ण मिशन की सदस्य बन गईं और सामाजिक कार्य करने लगीं. 1972 में सुचित्रा सेन को पद्मश्री पुरस्कार दिया गया. सुचित्रा सेन ने अपनी पूरी फिल्मी करियर के दौरान 52 बंगाली और चार हिंदी फिल्मों में काम किया था.

हिंदी सिनेमा में सुचित्रा ने कम ही काम किया था. उन्होंने कई बड़े निर्देशकों की फिल्मों में काम करने से मना किया. यहां तक की सुचित्रा ने राज कपूर की एक फिल्म में काम करने का प्रस्ताव भी ठुकराया है. फिल्म ठुकराने का कारण यह भी था कि राज कपूर का झुककर फूल देने का तरीका उन्हें पसंद नहीं आया था.

Published by Yash Sharma on 06 Apr 2019

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