मूवी रिव्यू: प्रधानमंत्री मोदी की जिंदगी के उतार-चढ़ावों से अवगत कराती है ‘पीएम नरेंद्र मोदी’

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लोकसभा चुनावों के नतीजों के बाद अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की फिल्म पीएम नरेंद्र मोदी रिलीज हुई है. बॉलीवुड एक्टर विवेक ओबेरॉय इस फिल्म में पीएम मोदी का किरदार निभा रहे हैं. फिल्म के ट्रेलर और कई पोस्टर्स बहुत पहले ही सामने आ चुके हैं. लोकसभा चुनावों में पीएम मोदी की जीत के बाद इस फिल्म से भी अच्छी कमाई के कयास लगाए जा रहे हैं.

फिल्म पीएम नरेंद्र मोदी को मशहूर डायरेक्टर ओमंग कुमार ने डायरेक्ट किया है. डायरेक्टर इससे पहले मैरी कॉम और सरबजीत जैसी उम्दा फिल्में दे चुके हैं. पीएम नरेंद्र मोदी फिल्म में उनकी जिंदगी के कई उतार-चढ़ावों को दिखाया गया है. वहीं दूसरी तरफ उनकी जिंदगी में कई विवाद भी रहे. फिल्म में यही सब दर्शाया गया है.

फिल्म पीएम नरेंद्र मोदी एक ऐसे शख्स की गुणगाथा है जिसने बचपन मुफलिसी में गुजारा, जवानी में ही मां का आशीर्वाद लेकर संन्यासी बन गया. गुरु के कहने पर बस्ती में लौटा और अपनी ही पार्टी की अंदरूनी सियासत से जूझकर जननायक बना. बालक नरेंद्र स्टेशन पर चीन सीमा पर जाते फौजियों को जब मुफ्त में चाय पिलाता है, तो यह फिल्म का पहला आधार होता है.

ओमंग ने इस फिल्म को रिश्तों की डोर से बांधा है. यह रिश्ते मोदी-शाह के रिश्तों को जय-वीरू जैसा रिश्ता बताते हैं. साथ ही यह भी बताते हैं कि बच्चों को विवेकानंद का साहित्य पढ़ने की सीख देने वाले माता-पिता को तब क्या करना चाहिए जब उनका अपना बच्चा विवेकानंद जैसा बनने की ठान लें.

फिल्म की एडिटिंग थोड़ी और कसी हुई हो सकती है. फिल्म के म्यूज़िक में याद रखने लायक कुछ नहीं है. बजाय हमें हमारे प्रधानमंत्री के निजी जीवन को दिखाने के, उमंग कुमार ने एक सुपरहीरो की कहानी लिखी है. फिल्म में पूरा फोकस मोदी की जिंदगी के कई अनछुए पहलुओं पर किया गया है. जो कि दर्शकों को उनसे रूबरू कराती है. फिल्म को सत्य घटनाओं से प्रेरित बताया गया है.

फिल्म के सेकंड हाफ में पीएम मोदी की रैली और उनके प्रधानमंत्री बनने से पहले के सफर पर फोकस किया गया. इस दौरान दिखाए गए पीएम मोदी के भाषण में विवेक ने अपनी भाषा को बखूबी पकड़ा और उन्हीं के अंदाज में स्पीच दी.

Published by Yash Sharma on 24 May 2019

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