बॉलीवुड की बेहद खूबसूरत और टैलेंटेड एक्ट्रेस थीं नूतन, जीते थे पद्मश्री समेत कई अवार्ड्स

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बॉलीवुड पर 4 दशक तक राज करने वाली एक्ट्रेस नूतन की 4 जून यानि आज बर्थ डे होता है. नूतन ने महज 14 साल की उम्र में फिल्मी सफर की शुरुआत की थी. नूतन बॉलीवुड का वह नगीना हैं जिसकी चमक से आज भी फिल्म जगत रोशन है. नूतन बॉलीवुड का वह नगीना हैं जिसकी चमक से आज भी फिल्म जगत रोशन है.

नूतन ने बतौर चाइल्ड आर्टिस्ट 14 साल की उम्र में ‘हमारी बेटी’ फिल्म से डेब्यू किया था. इस फिल्म को नूतन की मां शोभना सामर्थ ने ही डायरेक्ट किया था. पंचगनी के एक कॉन्वेंट स्कूल से पढ़ाई पूरी करने के बाद वह साल 1953 में उच्च शिक्षा के लिए स्विटज़रलैंड चली गईं. जहां वो तकरीबन एक साल तक रहने के बाद देश लौट आईं.

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A song rising from the pages- Vijay Anand on his direction of film songs! Vijay Anand is one of the pioneers of the Hindi film song, in that he always gave his songs a story,a characterisation, exercised his command instead of letting the choreographers and lyricists do the work(Yes modern Hindi film directors, I am looking right at you!) It gives his songs a unique cinematic relish(remember Guide) Here is the filmmaker himself speaking on his way of direction of his songs in an interview to Nasreen Munni Kabir. On the song "Dil ka bhanwar kare pukaar"(1st video above)- "In Tere Ghar Ke Samne, Dev Anand and Nutan sing the song on the steps of the inner stairway of the Qutab Minar. The sense that they have reached the peak of emotions is in the location, because you cannot get higher than the Qutab Minar. I did feel that love was like climbing the Qutab Minar—it’s an effort. And when you let yourself go, there is no effort any more." (What poetic usage of location! what depth to a song's driving emotional engine!) On the song "Khoya khoya Chand"- "If you have a song for Dev Anand, you have to bear in mind that he can’t dance. He has grace but not rhythm. You can’t make him dance. But he had a great presence and audiences used to see the film for his songs. In the Kala Bazar song “Khoya Khoya Chand”, Dev sings as he runs down the hill. He is madly in love and believes his dream is coming true. So let him move his hands— white hands against dark clothes—[as] he makes his way down the hill. It suited the scene, so once in a while you let him go." (look at the second video,what a marvelously ingenious, instinctive artistic call suitable to his actor and yet fulfilling his needs). Yes, now you can go look up the songs on YouTube!

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नूतन का ताल्लुक फिल्मी परिवार से रहा है. नूतन के माता-पिता डायरेक्टर थे जबकि बहन तनूजा एक्ट्रेस हैं. साल 1963 में रिलीज हुई ‘बंदिनी’ फिल्म में नूतन ने युवा कैदी का किरदार निभाया था. इस फिल्म में उनकी एक्टिंग को खूब सराहा गया. नूतन ने पहली बार दिलीप कुमार के साथ 1986 में ‘कर्मा’ फिल्म में काम किया था. इस फिल्म में वह दिलीप कुमार की पत्नी बनी थीं. इसके साथ ही नूतन ने देव आनंद के साथ कई सारी फिल्मों में अभिनय किया. इन फिल्मों में पेइंग गेस्ट, बारिश, मंजिल और तेरे घर के सामने शामिल हैं.

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#nutan #shammikapoor @pranutan @mohnish_bahl

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नूतन ने साल 1959 में रजनीश बहल से शादी की. इन दोनों के बेटे का नाम मोहनीश बहल है. मोहनीश बॉलीवुड में जाना पहचाना नाम है. वह कई सारी फिल्मों में काम कर चुके हैं. ‘कानून अपना अपना’ फिल्म नूतन के सामने ही रिलीज हुई थी जबकि उनकी दो फिल्में ‘नसीबवाला’ और ‘इंसानियत’ उनके निधन के बाद रिलीज हुई.

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भारत सरकार से पद्मश्री समेत कई सम्मान पाने वाली नूतन को साधना से लेकर स्मिता पाटिल जैसी अभिनेत्रियां अपना रोल मॉडल मानती रही हैं. नूतन ने कई सारे फिल्मफेयर अवॉर्ड जीते. ‘छोड़ दो आंचल जमाना क्या कहेगा’, सावन का महीना’, ‘चंदन सा बदन’, फूल तुम्हें भेजा है खत में’ ये सब गीत सदाबहार सुपरहिट्स में गिने जाते हैं.

Published by Yash Sharma on 04 Jun 2019

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