मध्यप्रदेश के कछालिया गांव में नहीं होता घरों में रंग-रोगन, विशेष कारण से मानते हैं अंधविश्वास

Get Daily Updates In Email

मध्य प्रदेश के रतलाम में एक ऐसा गजब गांव है जहां घरों की रंगाई-पुताई की मनाही है. सुनने में थोड़ा अजीब लगेगा लेकिन यह सच है. ना ही इस गांव में लोग पानी छानकर पीते हैं, ना की कोई शख्स यहां काले रंग की वस्तु का उपयोग करता है. ना ही कोई दूल्हा मंदिर के सामने से घोड़ी पर चढ़कर निकल सकता है, जिसके सम्मान में ये सारे अंधविश्वासों का लोग पालन करते हैं.

courtesy

यह बातें भले ही किसी फिल्म की कहानी या पुरानी मान्यताओं के समान लगती हैं. लेकिन मध्य प्रदेश का एक गांव ऐसा भी है जहां ये रिवाज, परम्पराएं आज के हाइटेक ज़माने में भी बदस्तूर जारी हैं. रतलाम के आलोट ब्लॉक के ‘कछालिया’ गांव की जहां मौजूदा धार्मिक मान्यताएं सोचने पर मजबूर कर देती हैं. इसी तरह दीपावली पर पशुओं के सिंग रंगने की जगह गेरू रंग का प्राइमर किया जाता है.

courtesy

कछालिया गांव में यह परंपरा पीढ़ियों से चली आ रही है. इस परंपरा को बुजुर्गों से लेकर बच्चे तक निभा रहे है. कछालिया की जनसंख्या 1400 है. यहां 200 मकान है. एक भी मकान पर रंगाई-पुताई नहीं की गई है. मात्र गेरू रंग का प्राइमर घर पर तैयार कर दरवाजों पर लगाया जाता है. 75 साल के मंदिर के पुजारी रतनपुरी गोस्वामी ने बताया कि गांव में कालेश्वर भगवान का मंदिर है. भगवान कालेश्वर में ग्रामीणों की आस्था है, इसलिए मंदिर को छोड़कर कोई भी अपने निजी मकान पर रंग-रोगन नहीं करता है.

courtesy

यह परंपरा पीढ़ियों से चली आ रही है लेकिन इसके पीछे मान्यता क्या है, यह किसी को नहीं पता है. दो-तीन बार जब परंपरा को तोड़ा गया तो हादसा हुआ. कालेश्वर भगवान के मंदिर के सामने से कोई घोड़ी पर बैठकर नहीं निकलता है, मंदिर के पीछे से निकल जाता है. पंचायत सचिव विनोद परिहार और सरपंच गोरधन सूर्यवंशी ने बताया कि गांव में पीएम आवास योजना के तहत पांच मकानों का निर्माण किया गया था. निर्माण के बाद रंगाई-पुताई के लिए हितग्राहियों को कहा गया तो उन्होंने साफ इनकार कर दिया.

Published by Yash Sharma on 22 Jun 2019

Related Articles

Latest Articles