इंदिरा गांधी के वो अहम फैसले जिनसे बना देश का बुनियादी ढांचा, किया देश को एक करने का काम

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आयरन लेडी के रूप में विश्व विख्यात श्रीमती इंदिरा गांधी का जन्म देश के एक आर्थिक एवं बैद्धिक रूप से समृद्ध परिवार में 19 नवंबर 1917 को इलाहाबाद के आनंद भवन में हुआ था. उनके पिता पं. जवाहर लाल नेहरू तथा माता का नाम श्रीमती कमला नेहरू तथा दादा का नाम पं. मोती लाल नेहरू था. फौलादी हौसलों वालीं इंदिरा गांधी ने लगातार तीन बार और कुल चार बार देश की कमान सम्भाली थी. वह की पहली और एकमात्र महिला प्रधानमंत्री रहीं.

इंदिरा गांधी 16 साल तक देश की प्रधानमंत्री रही थीं. इंदिरा गांधी अपनी प्रतिभा और राजनीतिक दृढ़ता के लिए आज भी विश्व भर में जानी जाती हैं. प्रधानमंत्री रहते हुए इंदिरा गांधी ने जो देश के लिए किया उसे भुलाया नहीं जा सकता. अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण और साहसिक फैसले लिए. उनके फैसलों ने देश को आर्थिक मोर्चे पर मजबूत बनाया.

इंदिरा गांधी ने अपने कार्यकाल के दौरान बैंकों के राष्ट्रीयकरण का अहम फैसला किया था. उन्होंने 19 जुलाई, 1969 को 14 निजी बैंकों का राष्ट्रीयकरण कर दिया था. इन बैंकों पर अधिकतर बड़े औद्योगिक घरानों का कब्ज़ा था. इंदिरा गांधी का मानना था कि बैंकों के राष्ट्रीयकरण होगा तो अच्छा रहेगा क्योंकि उसी की बदौलत देश भर में बैंक क्रेडिट दिया जा सकेगा.

वहीं इंदिरा गांधी ने ऐसा ही एक और कठिन फैसला लिया था. इंदिरा ने प्रिवी पर्स (राजभत्ता) को खत्म करने का फैसला किया था. उन्होंने 1971 में संविधान में संशोधन करके इसे बंद करवा दिया गया था. इस तरह राजे-महाराजों के सारे अधिकार और सहूलियतें वापस ले ली गई थी. भारत के विभाजन के बाद बंगाल से कटकर पूर्वी पाकिस्तान बना. यहां की जनता के पास नागरिक अधिकार नहीं थे.पूर्वी पाकिस्तान की स्वायत्ता के लिए शुरू से संघर्ष कर रहे थे. नतीजतन भारत के असम में करीब 10 लाख बांगला शरणार्थी पहुंच गए, जिनसे देश में आंतरिक और आर्थिक संकट पैदा हो गया.

भारत को बांग्लादेशियों के अनुरोध पर इस समस्या में हस्तक्षेप करना पड़ा जिसके फलस्वरुप 1971का युद्ध शुरू हुआ. इस युद्ध में करीब 93,000 पाकिस्तानी सैनिकों को युद्धबंदी बनाया गया. लंबे समय तक राजनीतिक अस्थिरता के बाद एक नए राष्ट्र का उदय हुआ. इसमें इंदिरा ने प्रधानमंत्री रहते हुए अहम भूमिका निभाई थी.

Published by Yash Sharma on 19 Nov 2019

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