27 वर्षीय शांतनु के नेक काम से प्रभावित हुए रतन, टाटा ने फोन लगाकर दिया जॉब का ऑफर

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भारत के लोकप्रिय बिजनेसमैन और फिलेनथ्रोपिस्ट रतन टाटा के साथ काम करना हर कोई चाहता है. हर किसी का सपना होता है कि वह एक दिन रतन टाटा के साथ काम करे. उनके साथ काम करना अपने आप में ही उपलब्धि है. यह भी सपने की ही तरह है जब रतन टाटा खुद आपको फोन करके साथ काम करने का ऑफर दें. लेकिन कुछ ही ऐसे खुशकिस्मत लोग हैं जिन्हें साथ काम करने के लिए खुद रतन टाटा ने फोन लगाया है.

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स्ट्रीट डॉग्स को बचाने के लिए खास बेल्ट बनाने वाले शांतनु से टाटा इतने प्रभावित हुए कि उन्हें पर्सनल निवेश का पूरा काम संभालने की जिम्मेदारी सौंपी । उन्होंने एग्जीक्यूटिव असिस्टेंट के पद पर 2017 में टाटा के साथ काम करना शुरू किया था । वे 30 से ज्यादा स्टार्टअप्स में रतन टाटा के पर्सनल निवेश का काम संभालते हैं ।। @ratantata . Pic : @google News : @dainikbhaskar_ . #welcometojamshedpur #TeamVOH #TeamWTJ #TeamBIVU #jamshedpurcity #jamshedpur #ilovejamshedpur #festivals #sakchi #bistupur #kadma #mango #jamshedpurfc #tatanagar #tatasteel #tatanagarjunction #jrdtatasportscomplex #smartcity #steelcity #greencity #cleancity #ShantanuNaidu #dogs #success

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मुंबई के रहने वाले 27 साल के शांतनु नायडू भी उनमें से ही एक हैं. जिनके साथ काम करने की खुद रतन टाटा ने इच्छा जताई है. यह कहानी खुद शांतनु ने फेसबुक पर ‘Humans of Bombay’ से साझा की है. शांतनु की यह कहानी जमकर वायरल हो रही है. अब तक इसे 20 हजार से ज्यादा लोग लाइक कर चुके हैं. वहीं 1.7 हजार से ज्यादा यूजर्स ने इसे शेयर किया है. शांतनु बताते हैं कि रतन टाटा से उनकी मुलाकात 5 साल पहले हुई थी.

“I graduated in 2014 and started working at Tata group. Life was going pretty smooth, until one evening, while on my way…

Gepostet von Humans of Bombay am Mittwoch, 20. November 2019

शांतनु ने बताया कि सड़क पर आवारा कुत्तों की लगातार पांच साल पहले संख्या कम हो रही थी जिसकी वजह से वह बहुत दुखी हो गए थे. इस पर कुछ करने के लिए शांतनु ने एक आइडिया सोचा. शांतनु ने इस पर काम करना शुरु किया. रिफ्लेक्टर लगे हुए कॉलर्स कुत्तों के गलों पर शांतनु ने लगाने शुर कर दिए. उन्होंने कुत्तों के गलों पर इसलिए इसे लगाया क्योंकि सड़क पर कुत्तों के होने की जानकारी दूर से ही ड्राइवर्स को पता चल जाए. शांतनु के इस काम की बहुत तारीफ हुई थी. इतना ही नहीं उनकी यह स्टोरी टाटा ग्रुप ऑफ कंपनीज के न्यूजलेटर में भी छापी गई.

शांतनु के पिता भी कुत्तों से बहुत प्यार करते हैं. उन्होंने अपने बेटे से कहा कि वह रतन टाटा को लेटर लिखें. सुनकर शांतनु को थोड़ा अजीब लगा, वे हिचकिचाए भी. लेकिन फिर हिम्मत जुटा कर पत्र लिख दिया. दो महीने बाद उसका जवाब आया. जवाब में रतन टाटा ने शांतनु को एक मीटिंग के लिए आमंत्रित किया गया था. शांतनु रतन टाटा से मुंबई में मिले. मुलाकात के दौरान रतन टाटा ने शांतनु से कहा, ‘आप जो काम करते हैं, उससे मैं बहुत ज्यादा प्रभावित हुआ हूं!’ मीटिंग के बाद वे रतना टाटा के घर उनके कुत्तों से भी मिले. शांतनु को उनके काम के लिए फंड मुहैया कराया.

Published by Yash Sharma on 26 Nov 2019

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