अमिताभ ने खोया अपना सबसे पुराना गुलमोहर का पेड़, पोस्ट कर शेयर की पेड़ से जुड़ी यादें

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अमिताभ बच्चन सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहते हैं. वो आए दिन कुछ ना कुछ शेयर करते रहते हैं. वहीं लोग ये भी जानते हैं कि वो ब्लॉग भी लिखते हैं जिनमें वो अपनी लाइफ से जुड़ी बहुत सारी बातें शेयर करते हैं. वहीं हाल ही में अमिताभ ने अपने एक ब्लॉग में उस गुलमोहर के पेड़ के बारे में बताया जो उनके पूरे परिवार के बहुत करीब था. दरअसल अमिताभ जहां रहते हैं उसी घर में एक पेड़ लगा था जिसका नाम उनके माता और पिता ने प्रतीक्षा रखा था लेकिन दुख की बात ये रही कि अब वो मुंबई के तूफान में गिरा दिया. अपने पेड़ की पुरानी यादों को याद कर अमिताभ ने अपने ब्लॉग में बहुत सारी बातें शेयर की तो चलिए अमिताभ के इस खास पेड़ की आपको कुछ खास बातें बताते हैं.

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“.. जो बसे हैं वे उजड़ते हैं , प्रकृति के जड़ नियम से ; पर किसी उजड़े हुए को , फिर बसाना कब मना है ? .. है अन्धेरी रात पर दीवा जलाना कब मना है ? “ ~ हरिवंश राय बच्चन This large ‘gulmohar’ tree was planted as a sapling by me when we got our first house Prateeksha in 1976 .. the recent storm brought it down .. but yesterday on my Mother’s birthday Aug 12th I replanted a fresh new Gulmohar tree in her name ..🙏🙏 at the same spot !

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घर में लगे 43 साल पुराने गुलमोहर के उस पेड़ की कहानी शेयर की जो हाल ही में हुई बारिश के दौरान धराशायी हो गया. उन्होंने बताया कि किस तरह ये पेड़ उनके हर सुख-दुख में शामिल रहा. साथ ही ये भी बताया कि उनके घर का नाम उनके दिवंगत पिता हरिवंशराय बच्चन की एक कविता से लिए गए शब्द पर रखा गया था. अपने पोस्ट में उन्होंने लिखा, ‘1976 में जिस दिन हम अपने पहले घर में आए थे. जिसे इस पीढ़ी ने कभी खरीदा और बनाया था, और इसे अपना कहा था. इसे एक पौधे के रूप में लगाया गया था, तब ये सिर्फ कुछ इंच ऊंचा था. और इसे लॉन के बीच में लगाया गया था, जो कि संपत्ति के आसपास है.’

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यहाँ कुछ लोगों के साथ , उनके विचारों पे उत्तर दिए ; कुछ स्वयं सोच विचार किया ; कुछ पुराने क्रिकेट मैच देखे , कुछ समय विश्राम किया ; एक documentary देखी ; नाम ना बताऊँगा 😁 ; दवाओं का सेवन किया ; मोबाइल में और कितने गुण छुपे हैं उनका ज्ञान प्राप्त किया ; अब फिर सम्पर्क कर रहा हूँ आप सभी देवजनों व देवियों के साथ ; और कुछ ही देर में शयन । दिन कट गया ; कल फिर इसी दिनचर्या से दिन कटेगा – स्थिर , शांत , सुनसान प्रणाम

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77 वर्षीय मेगास्टार ने आगे कहा, ‘बच्चे इसके चारों ओर खेलकर बड़े हुए. उनके जन्‍मदिन, त्योहारों और उत्सवों पर इस गुलमोहर के सुंदर पेड़ को सजाया गया. बच्चों ने इससे कुछ ही फीट की दूरी पर शादी की थी. उन पर इसका साया एक अभिभावक की तरह था. जब हमारे बुजुर्गों का निधन हुआ तो दुःख और शोक के भार से इसकी शाखाएं झुक गईं.’

वर्तमान में बच्‍चन जलसा नाम के एक अन्य बंगले में रहते हैं. हर रविवार, जलसा के बाहर लोगों की भीड़ अमिताभ बच्चन की एक झलक देखने के लिए इकट्ठा होती है और वे बाहर आकर उनका अभिवादन करते हैं. काम को लेकर बात करें तो अमिताभ बच्चन आखिरी बार अमेज़ॅन प्राइम पर रिलीज हुई ‘गुलाबो सिताबो’ में नज़र आए थे. इसमें उनके साथ आयुष्मान खुराना भी हैं. फिल्म का निर्देशन शूजीत सरकार ने किया है.

Published by Yash Sharma on 14 Aug 2020

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