इनसाइडर-आउटसाइडर की बहस में बोले बॉबी देओल – ‘मैं एक इनसाइडर हूं फिर भी स्ट्रगल कर रहा हूं’

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फिल्म इंडस्ट्री में इन दिनों नेपोटिज्म और आउटसाइडर्स-इनसाइडर्स की बहस लगातार बढ़ती नजर आ रही है. आए दिन बॉलीवुड से जुड़े लोग इसे लेकर अपनी राय पेश कर रहे हैं. इसी बीच अब बॉलीवुड के फेमस एक्टर धर्मेंद्र के बेटे और एक्टर बॉबी देओल ने भी अपनी राय रखी है.

एक्टर का कहना कहना है कि सिर्फ फिल्मी परिवार में जन्म लेने से करियर नहीं बन जाता है बल्कि इसके लिए अच्छा काम करने की भी जरूरत है. एक्टर ने कहा – ‘अगर आप फिल्मी परिवार से ताल्लुक रखते हैं तो आपको पहली फिल्म आसानी से मिल जाती हैं लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि एक फिल्म आपका करियर बना देगी. यदि आपका काम अच्छा है तो लोग आपके साथ काम करना चाहेंगे. मेरा करियर भी बना है. जब मुझे लॉन्च किया गया तो मैं देओल था. मेरी खुद की पहचान सिर्फ बॉबी है. मुझे लगता है, मैं एक इनसाइडर हूं फिर भी स्ट्रगल कर रहा हूं.’

आगे बॉबी देओल ने कहा – ‘नेपोटिज्म सिर्फ फिल्म इंडस्ट्री में नहीं बल्कि हर जगह होता है. मुझे लगता है. इसमें उन बच्चों की कोई गलती नहीं है जो इस बिजनेस से ताल्लुक रखने वालों के घरों में पैदा हुए हैं और बड़े हुए हैं. उन्होंने खुद उस परिवार में पैदा होने का फैसला नहीं किया. हर मां बाप का फर्ज होता है कि वो अपने बच्चे को सही दिशा में आगे बढ़ाएं, उन्हें पढाएं, फिर वो जो प्रोफेशन चुनना चाहें उसमें उन्हें सपोर्ट करें. कई बार डॉक्टर का बेटा डॉक्टर बनना चाहता है या उसके पिता उसे डॉक्टर ही बनाना चाहते हैं. ऐसा ही यहां पर है, एक्टर का बेटा एक्टर बनना चाहेगा. मुझे लगता है कि स्ट्रगल और मौके सभी को समान मिलते हैं.’

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बीते दिन ही एक्टर ने अपने बीते समय के बारे में भी बताया था. बॉबी ने कहा था – ‘जब आप खुद पर तरस खाने लगते हैं तो दुनिया के बारे में उल्टा-सीधा बोलना शुरू कर देते हैं. ये सब मेरे साथ करीब दो से तीन साल तक हुआ. मैं खुद पर तरस खाने लगा था. सोचने लगा था कि कोई मेरे साथ काम नहीं करना चाहता. मैंने शराब पीनी शुरू कर दी, खुद को ब्लेम करने लगा.’

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आगे बॉबी ने कहा था – ‘फिर एक दिन मुझे महसूस हुआ कि मैं खुद के साथ आखिर कर क्या रहा हूं. मैं कहां गलत रहा. मैं अपने बच्चों की आंखों में देखने लगा था कि हमारे पापा पूरा दिन घर पर रहते हैं. पत्नी और मां में भी ऐसा ही देखा. देखने के बाद मेरे अंदर कुछ तो बदला. मुझे महसूस हुआ कि अगर मुझे आगे बढ़ना है तो मुझे किसी का इंतजार नहीं करना चाहिए. खुद से काम करना चाहिए. तब जाकर मैंने खुद पर काम करना शुरू किया. दो से तीन साल में मैं काफी व्यस्त रहा हूं.’

Published by Chanchala Verma on 21 Aug 2020

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