गुलाब के फूलों से सजाई गई इरफ़ान खान की कब्र, सुतापा और बाबिल ने शेयर किया फोटो

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कुछ दिनों पहले बॉलीवुड एक्टर इरफ़ान खान की कब्र को लेकर चर्चा हो रही थी. दरअसल इरफ़ान की कब्र का एक फोटो सामने आया था. जिसके बाद सभी ने कब्र की सफाई ना होने की वजह से इस बात की शिकायत की थी. लगातार आ रही इन शिकायतों के बाद इरफ़ान खान के बेटे अपने पिता की कब्र की सफाई करने पहुंचे थे.

हाल ही में इरफ़ान खान की पत्नी सुतापा सिकदर ने एक्टर की कब्र का फोटो शेयर किया है. जिसमें इरफ़ान की कब्र गुलाब के फूलों से सजी हुई नजर आ रही है. इस फोटो को शेयर करने के साथ ही सुतापा ने लंबा नोट भी लिखा है. सुतापा ने लिखा है- ‘मैं आपको कुछ बताऊंगी, हर दिन लोग मरते हैं और यह सिर्फ शुरुआत है. हर दिन घरों में अंतिम संस्कार होता है. नई विधवाएं और लोग अनाथ होते हैं. वो हाथ जोड़कर बैठ जाते हैं और इस जिंदगी के बारे में फैसला करने की कोशिश में जुट जाते हैं.’

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I'll tell you something: every day people are dying. And that's just the beginning. Every day, in funeral homes, new widows are born, new orphans. They sit with their hands folded, trying to decide about this new life. Then they're in the cemetery, some of them for the first time. They're frightened of crying, sometimes of not crying. Someone leans over, tells them what to do next, which might mean saying a few words, sometimes throwing dirt in the open grave. And after that, everyone goes back to the house, which is suddenly full of visitors. The widow sits on the couch, very stately, so people line up to approach her, sometimes take her hand, sometimes embrace her. She finds something to say to everbody, thanks them, thanks them for coming. In her heart, she wants them to go away. She wants to be back in the cemetery, back in the sickroom, the hospital. She knows it isn't possible. But it's her only hope, the wish to move backward. And just a little, not so far as the marriage, the first kiss. by #Louise Gluck#Nobelprize#celebratinglifeand death

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सुतापा के साथ ही इरफान खान के बेटे बाबिल ने भी इस फोटो को शेयर किया और एक लेखक की कुछ लाइनें लिखी हैं. बाबिल लिखते हैं – ‘जब एक आदमी पैदा होता है, तो वह कमजोर और लचीला होता है. जब वह मर जाता है, तो वह कठोर और असंवेदनशील होता है. जब एक पेड़ बढ़ रहा होता है, तो वह कोमल होता है, लेकिन जब वह सूखता है और कठोर होता है, तो वह मर जाता है. कठोरता और शक्ति मौत के साथी हैं.’ आगे बाबिल ने लिखा है – ‘आप कभी कठोर नहीं रहे, आपकी क्षमाशील और संवेदनशील आत्मा है.’

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“When a man is just born, he is weak and flexible. When he dies, he is hard and insensitive. When a tree is growing, it’s tender and pliant, but when it’s dry and hard, it dies. Hardness and Strength are death’s companions. Pliancy and weakness are expressions of the freshness of being. Because what has hardened will never win.” – Tarkovsky . Here’s to watching ‘Stalker’ with you for my first film essay three years ago, I’m watching ‘Stalker’ now for the last dissertation. I pause the film from time to time, just like you did with me, to take it all in, you were teaching me then, now I teach myself. Here’s to you, who never hardened, here’s to your forgiving, sensitive soul.

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जब बाबिल अपने पिता की कब्र की सफाई करने पहुंचे थे. तब उन्होंने कब्र का फोटो शेयर करते हुए लिखा था – ‘मौत उन लोगों के लिए दर्दनाक होती है जो आपके दिल के सबसे करीब हों, लेकिन आपने मुझे सिखाया कि मौत केवल एक शुरुआत है. इसलिए मैं यहां अपने मन में आपकी जिंदगी को सेलिब्रेट कर रहा हूं. मैं ‘द बीटल्स’ के गाने सुन रहा था लेकिन आपने मुझे ‘द डोर्स’ का जुनून चढ़ा दिया और हम साथ में गाया करते थे. मैं अभी भी वो गाने गाता हूं और तब आपको महसूस करता हूं.’

Published by Chanchala Verma on 09 Oct 2020

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