अपने 8 साल के स्ट्रगल को लेकर पंकज त्रिपाठी ने की बात, अब तक नहीं देखे ‘मिर्जापुर-2’ के सारे सीजंस

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बॉलीवुड एक्टर पंकज त्रिपाठी आज अपनी संजीदा एक्टिंग से सभी का दिल जीत चुके हैं. आज पंकज शर्मा इंडस्ट्री में जिस मुकाम पर पहुंचे हैं, उसके लिए उन्होंने खूब मेहनत की है. पंकज त्रिपाठी हाल ही में रिलीज हुई वेब सीरीज ‘मिर्जापुर 2’ में नजर आए हैं. इस वेबसीरीज में निभाया कालीन भईया का किरदार दर्शकों को खूब पसंद आता है. इस किरदार में पंकज ने जान डाल दी है. लेकिन अभी तक पंकज ने ‘मिर्जापुर’ सीजन 2 के 5 एपिसोड ही देखे हैं.

हाल ही में दिए एक इंटरव्यू में पंकज ने बताया – ‘मैंने 5 एपीसोड देख लिए हैं. 5 और देखने बाकी हैं. मैं शो को फास्ट फॉरवर्ड कर लेता हूं और बस अपने सीन देख लेता हूं. बाकी लोगों के सीन आगे बढ़ा देता हूं. लेकिन मुझे ऐसा नहीं करना चाहिए.’

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आगे पंकज कहते हैं- ‘धीरे-धीरे तरक्की करने की एक प्रक्रिया होती है.’ पंकज का कहना है कि वह खुद भी स्लाइस-ऑफ-लाइफ ड्रामा (जिसमें जीवन के किसी एक हिस्से का चित्रण होता है) के फैन हैं. वह कहते हैं मुझे सादगी, ह्यूमर, संगीत और ओल्ड वर्ड चार्म वाली फिल्में पसंद आती हैं. मुझे ये क्राइम, गोली, बंदूक, गाली वाली फिल्में अच्छी नहीं लगतीं.’ इसके साथ ही क्षेत्रीय सिनेमा की तारीफ करते हुए उन्होंने कई फिल्मों के नाम लिए जैसे – कोर्ट, तिथि, किल्ला, शिप ऑफ थीसस, चैतन्य तमहाने की फिल्म दि डिसिप्लिन उन्हें अभी देखनी है.

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पंकज जल्द ही ‘लूडो’ फिल्म में नजर आने वाले हैं. जिसमें वह डॉन के रोल में नजर आएंगे. फिल्म नेटफ्लिक्स पर रिलीज होगी. फिल्म में पीले चश्मे पहनने की बात पर पंकज कहते हैं- ‘मैं भी स्क्रीन पर पीले चश्में और लाल जूते पहनना चाहता हूं. बस मुझे कभी कोई वो मौका नहीं देता.’ बता दें फिल्म ‘लूडो’ में पंकज रोमांस करते हुए भी नजर आने वाले हैं. जिसमें वह कहते हैं- ‘सत्तू की एक छोटी सी प्रेम कहानी भी है. फिल्म देखने के बाद लोग उसे एक गैंगस्टर की तरह याद नहीं रखेंगे.’

इसके साथ ही फिल्म इंडस्ट्री में अपनी स्ट्रगल को लेकर पंकज कहते हैं- ‘यहां सबको मौका मिलता है लेकिन बाहर से आए लोगों को थोड़ी ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है. जब आप इंडस्ट्री में एक बाहरी के तौर पर आते हैं तो, आपको एक बॉल पर 7 रन बनाने होते हैं. एक छक्का मारिए और एक रन दौड़ कर लीजिए. उसका मजा ही इसी में हैं. जितने मौके मिल रहे हैं उनका भरपूर इस्तेमाल करिए. 2004 से 2012 तक मैं काम ढूंढ़ रहा था लेकिन वही वक्त था जब मैं अपनी कला को बेहतर भी कर रहा था. अपनी कला को इतना बेहतर कर लीजिए कि हमेशा तैयार रहिए. मेरा सफर इस बात का प्रमाण है कि फिल्म इंडस्ट्री इतनी बुरी भी नहीं है जितनी कही जाती है.’

Published by Chanchala Verma on 10 Nov 2020

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