लंबी बातचीत के बाद सरकार ने मांगे किसानों के 4 में से 2 प्रस्ताव, चार जनवरी को होगी अगली वार्ता

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लंबे समय से किसान सरकार के खिलाफ आंदोलन कर रहे हैं. आज किसान संगठनों और सरकार के बीच बातचीत हुई. जो काफी समय तक चली लेकिन इसका कोई समाधान नहीं निकल सका. सरकार के साथ बातचीत शुरू करने से पहले किसान नेता राकेश टिकैत का कहना था कि सरकार कानून वापस नहीं लेगी तो प्रदर्शन खत्म नहीं होगा. सरकार को कानून वापस लेना ही पड़ेगा, संशोधन पर बात नहीं बनेगी. केंद्रीय मंत्री सोमप्रकाश का कहना था कि उन्हें उम्मीद है आज ही किसान आंदोलन खत्म हो जाएगा. सरकार किसानों के साथ खुले मन से बात कर रही है, जो भी सुझाव आएंगे उसपर विचार किया जाएगा. सुबह सिंघु बॉर्डर से किसान नेता विज्ञान भवन पहुंचे. कृषि कानून को लेकर दोनों पक्षों में छठे राउंड की यह बातचीत है.

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सरकार से बातचीत से पहले किसान नेता राकेश टिकैत का कहना है कि हमें उम्मीद है सरकार को कुछ ज्ञान प्राप्त हुआ होगा. हमारा रुख सरकार की वजह से अड़ियल हुआ है, ये किसान सिर्फ कारोबारियों के फायदे वाला है. हम सिर्फ कानून वापसी पर चर्चा करेंगे. हमारी ओर से अब 26 जनवरी को ट्रेक्टर रैली निकालने की तैयारी की जा रही है. किसान यूनियन (दाओबा) के मंजीत सिंह ने इस बारे में कहा कि अगर सरकार चाहती है कि आंदोलन खत्म हो, तो उन्हें तीनों कानून वापस लेने चाहिए. पीएम कहते हैं कि सरकार किसानों के साथ है, तो उन्हें हमारी मांग माननी चाहिए. किसान संगठनों का कहना है कि उन्हें कोई संशोधन नहीं चाहिए बल्कि कानून वापस होने चाहिए.

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विज्ञान भवन में हुई इस बैठक में 40 किसान संगठन शामिल हुए. जबकि सरकार की ओर से केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर, पीयूष गोयल बैठक में शामिल हुए. किसान संगठनों की मांग है कि तीनों कानून वापस होने चाहिए. विज्ञान भवन के बाहर लंगर की व्यवस्था भी की गई. हालांकि पिछली बैठकों में किसानों ने सरकार द्वारा दिए गए भोजन को खाने से इनकार कर दिया था. विज्ञान भवन में बातचीत के दौरान मंत्रियों ने किसानों के साथ लंगर खाया. केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर और पीयूष गोयल भी प्लेट लेकर लाइन में खड़े थे. यह किसान-सरकार के बीच 7वें दौर की बातचीत थी.

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सरकार ने कहा कि तीनों कृषि कानूनों से जुड़ी मांगों और मुद्दों पर चर्चा करने के लिए एक समिति बनाई जा सकती है. सरकार ने कानूनों से जुड़ी जानकारी दी और कहा कि कानून बनाने और वापस लेने की एक लंबी प्रक्रिया है. केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि किसानों ने चार प्रस्ताव रखे थे, जिसमें दो पर सहमति बन गई है. पर्यावरण संबंधी अध्यादेश पर रजामंदी हो गई है. एमएसपी पर कानून को लेकर चर्चा जारी है. हम एमएसपी पर लिखित आश्वसन देने के लिए तैयार हैं. एमएसपी जारी रहेगी. बिजली बिल को लेकर भी सहमति बन गई है. पराली के मुद्दे पर भी रजामंदी हो गई है. आगे केंद्रीय मंत्री ने कहा कि मुद्दों पर किसान-सरकार के बीच 50 फीसदी सहमति बन गई है. किसानों के लिए सम्मान और संवेदना है. आशा है कि किसान और सरकार में सहमति बनेगी. समिति बनाने के लिए सरकार पहले दिन से तैयार है.

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आखिर में किसान नेता राकेश टिकैत ने कहा कि सरकार ने हमारी दो मांगों को मान लिया है. आज की बातचीत अच्छी रही. अब चार जनवरी को अगली वार्ता होगी, तब तक शांतिपूर्ण ढंग से किसानों का प्रदर्शन जारी रहेगा. तब तक किसान शांतिपूर्ण प्रदर्शन करेंगे.

Published by Chanchala Verma on 30 Dec 2020

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