तमिलनाडु के एक स्टूडेंट ने बनाया सबसे हल्का सैटेलाइट, अगले साल नासा करेगा लॉन्च

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टेक्नोलॉजी के विकास की वजह से छात्रों के लिए पढ़ना आसान हो गया है. अलग-अलग टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करते हुए ही छात्र नए-नए इन्वेक्शन करते हैं. यही वजह है कि आज हमारा देश इतनी तरक्की कर रहा है. आज हम आपसे ऐसे ही एक छात्र के बारे में बात करने जा रहे हैं. जिसने अपने इन्वेंशन से सभी को हैरान कर दिया है. यही नहीं इस इन्वेंशन के लिए इस छात्र की खूब तारीफ़ भी की जा रही है.

हम जिस छात्र की बात कर रहे हैं वह तमिलनाडु के रियासदीन सम्सुद्दीन त्रिची के शस्त्र यूनिवर्सिटी में मेकट्रोनिक्स इंजीनियरिंग के सेकेंड ईयर के स्टूडेंट हैं. इस छात्र ने अपनी खोज से ऐसा कमाल कर दिखाया है कि अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने उनकी सराहना की है. दरअसल इस छात्र ने दुनिया का सबसे हल्का सैटेलाइट बनाकर नासा के साइंटिस्ट को भी हैरान कर दिया है. यही नहीं इस सैटेलाइट को नासा अगले साल लॉन्च करने की तैयारी कर रहा है. छात्र ने FEMTO वैराइटी का सैटेलाइट विजन सैट 1 और 2 बनाया है. इन दोनों का वजन मात्र 33 मिलीग्राम है. यही नहीं यह आकार में सिर्फ 33 मिलीमीटर है. विजन सैट 1 और 2 एक चौकोर क्यूब के आकार का है. जिसमें 11 सेंसर लगे हैं. जो माइक्रोग्रैविटी पर रिसर्च करने में मदद करेंगे. इस सैटेलाइट को थ्रीडी प्रिंटेड पॉलीथेरीमाइड थर्मोप्लास्टिक से बनाया गया है.

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अपने इस सैटेलाइट को लेकर रियासदीन सम्सुद्दीन ने कहा कि थ्रीडी प्रिंटेड पॉलीथेरीमाइड थर्मोप्लास्टिक एक प्रकार का रेसिन मटेरियल है. इसका उपयोग सैटेलाइट में लगने वाले गोल्ड और टाइटेनियम जैसे धातुओं की जगह किया जा सकता है. ताकि वे हल्के और लंबे चलने वाले बने. आगे रियासदीन ने बताया कि थ्रीडी प्रिंटेड पॉलीथेरीमाइड थर्मोप्लास्टिक कितना चलेगा इसका परीक्षण नासा के लॉन्च के बाद होगा. अगर यह मटेरियल स्पेस में बचा रहता है तो सैटेलाइट में उपयोग होने वाले गोल्ड और टाइटेनियम जैसे धातुओं का उपयोग कम हो जाएगा.

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अब यह सैटेलाइट लॉन्च होने के बाद कितना सक्सेसफुल होता है. इसके लिए तो हमें इंतजार करना पड़ेगा.

Published by Chanchala Verma on 30 Dec 2020

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