भारत की प्राचीन टेक्नोलॉजी पर भरोसा करते हैं टाटा ग्रुप के चेयरमैन रतन टाटा, की तारीफ़

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टाटा ग्रुप के चेयरमैन रतन टाटा ने कुछ समय पहले ही देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ़ की थी. इसी बीच अब रतन टाटा ने कहा है कि उन्हें भारत की प्राचीन टेक्नोलॉजी पर बहुत भरोसा है. टाटा का कहना है कि इस तकनीक में बहुत सी संभावनाएं हैं. मगर, उनका इस्तेमाल करने वालों की कमी है. महिलाओं की भागीदारी सिर्फ स्टाइल या स्टाइलिंग के क्षेत्र तक सीमित नहीं. अब ऐसी कोई दीवार नहीं जो महिलाओं को किसी भी क्षेत्र में बढ़ने से रोक सके.

दरअसल, नए साल के मौके पर टाटा ने कहा – ‘आज भी जो घर बन रहे हैं. वे गर्मियों में गरम और सर्दियों में ठंडे हो जाते हैं. यानी उन्हें ठंडा और गरम करना पड़ता है जिसका खामियाजा मानवजाति को बढ़ते खर्च और जलवायु को कार्बन उत्सर्जन के तौर पर उठाना पड़ रहा है. इस क्षेत्र में बड़ी संभावनाएं हैं, लेकिन अभी भी बहुत लोग नहीं हैं. जो इस दिशा में काम करना चाहते हों. स्टील का बड़ा अच्छा विकल्प बांस है. कई किस्म की ऐसी चीजें भी हैं जिनका कोई उपयोग नहीं है, लेकिन वे कंस्ट्रक्शन मटेरियल के तौर पर इस्तेमाल में ली जा सकती हैं. अमेरिका में 10 फ्लोर की इमारतें भी लकड़ी से बनाई जा रही हैं, जो न सिर्फ मजबूत हैं, बल्कि उनमें आग रोकने की भी काबिलियत है. दिक्कत यह है कि अगर लकड़ी से 10 या 20 माले की इमारतें बन सकती हैं तो स्टील से 100 माले के भी ऊपर जाया जा सकता है.’

आगे उन्होंने कहा – ‘मध्य अमेरिका में अधिकतर घर आज भी लकड़ी के बने हैं. जापान में भी इस क्षेत्र में इनोवेशन देखने को मिल रहा है, लेकिन जो हो रहा है वह काफी नहीं है. भारत की प्राचीन टेक्नोलॉजी की भी आज बहुत उपयोगिता है. संभावनाएं तो बहुत हैं, लेकिन इन्हें इम्प्लीमेंट करने वालों की कमी है. कम संसाधन में बहुत बड़ा काम कर पाने की क्षमता भारत की ताकत बन सकती है. यह बात सही है कि टेक्नोलॉजी के लिए इन्वेस्ट करना होगा. अगर भारत की युवा जनसंख्या को पूंजी का सपोर्ट मिल जाए तो बहुत कुछ हो सकता है. भारत तीसरी दुनिया से बाहर कैसे आ पाएगा यह भी बड़ा मुश्किल सवाल है, लेकिन जवाब असंभव नहीं है. ईमानदारी से चाह लेंगे तो हो जाएगा.’

आगे महिलाओं को लेकर रतन टाटा ने कहा – ‘कोई अंदाज भी नहीं लगा सकता था कि एक समय ऐसा आएगा. जब बड़ी संख्या में महिलाएं न सिर्फ राष्ट्राध्यक्ष बनेंगी, बल्कि उनके हाथों में बहुत बड़ी कंपनियों की बागडोर होगी. खासतौर पर नई टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में महिलाओं की हिस्सेदारी काफी बढ़ी है, जो बहुत तसल्ली देने वाली बात है. सबसे अच्छी बात तो यह है कि आज कोई ऐसी दीवार नहीं बची है जो महिलाओं को किसी क्षेत्र में जाने से रोक सके. किसी को अच्छा लगे या नहीं, लेकिन औरतों की हिस्सेदारी सिर्फ स्टाइल तक सीमित नहीं रहेगी. आर्मी हो या उद्योग, सारे क्षेत्रों में महिलाएं अपना लोहा मनवा रही हैं और तेजी से मनवाती रहेंगी.’

आखिर में टाटा ने कहा – ‘एक समय था जब संगीत मेरे घर का अभिन्न हिस्सा था. मेरी जैज, कंट्री और क्लासिकल संगीत में गहरी रुचि रही है. मुझे बड़ा दुख होता है. यह सोच कर कि काम और दायित्वों के बोझ तले मेरा संगीत दबता चला गया. मैं जानता हूं कि मैं कोई बहाने नहीं बना सकता. मुझे लगता है मैं संगीत को फिर से अपने जीवन में शामिल कर सकता हूं. मेरे पास एक बड़ा सुंदर म्यूजिक सिस्टम है, लेकिन दुख कि बात यह है कि पिछले सात साल में मैंने उसे शायद तीन बार ही चलाया होगा. मेरे पास सैकड़ों डिस्क और सीडी का अंबार है जो मेरे घर को संगीतमय कर सकता है. मैं संगीत की ताकत को भी जानता हूं. मैं जानता हूं कि लालच, स्वार्थ और आतंकवाद का विकल्प भी संगीत है, लेकिन दुख की बात तो यह है कि आपके जैसे जब तक कोई इस विषय को उठाता नहीं है तब तक मैं संगीत के बारे में सोच भी नहीं पाता. मुझे बीथोवेन, चेकोव्सकी को सुनना बेहद पसंद है। 70 और 80 के दशक का संगीत मुझे पसंद है. जॉन डेन्वर को हम भारत भी ले कर आए थे और उनका टाटा थिएटर में कॉन्सर्ट भी करवाया गया था.’

Published by Chanchala Verma on 02 Jan 2021

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