अन्य देशों के मुकाबले भारत है सबसे तेज मूविंग द्वीप, टेक्टोनिक प्लेट के घूर्णन से होती है धरती में हलचल

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पृथ्वी की ऊपरी परत वैसे तो एक सी दिखती है लेकिन वास्तव में ये बहुत सी प्लेटों से मिलकर बनी है. जिन्हें टेक्टोनिक प्लेट कहते हैं. यह प्लेट किसी ठोस चीज पर नहीं रखी है. एक पेस्ट जैसी नाजुक पदार्थ पर रखी है. जिसकी वजह से इन विशाल प्लेटों में निम्नस्खलन गतिविधि होती रहती है. इन गतिविधियों के कारण ही बड़े-बड़े भौगोलिक बदलाव आते हैं. ताजा शोध के मुताबिक इन सभी बदलावों के पीछे खनिज के छोटे छोटे कण जिम्मेदार हैं.

हमारी धरती जिन सात टेक्टोनिक प्लेटों पर टिकी है. यदि इनमें कोई हलचल होती है तो धरती कांपती है. भारत और ऑस्ट्रेलिया प्लेट पर टिका है और हमारे यहां अधिकतर भूकंप इस प्लेट के यूरेशियन प्लेट से टकराने के कारण उपजते हैं. भूकंप के झटकों का कारण भूगर्भ से तनाव-ऊर्जा उत्सर्जन होता है. यह ऊर्जा अब भारतीय प्लेट की उत्तर दिशा में बढ़ने और फॉल्ट या कमजोर जोनों के जरिए यूरेशियन प्लेट के साथ इसके टकराने के चलते एकत्र हुई है.

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कई सदियों से धीरे-धीरे पृथ्वी की गति में बदलाव आता रहा है. हालांकि यह बदलाव इतना कम होता है कि जल्दी समझ में नहीं आता. इस प्रकार के बदलाव विभिन्न कारणों की गति के कारण अवतरित होते हैं. भारत पूरी तरह से भारतीय प्लेट पर स्थित है. यह एक प्रमुख टेक्टोनिक प्लेट है जिसका निर्माण प्राचीन महाद्वीप गोंडवानालैंड के टूटने से हुआ है. लगभग 9 करोड़ वर्ष पूर्व उत्तर क्रेटेशियस शक के दौरान भारतीय प्लेट ने उत्तर की ओर लगभग 15 सेमी प्रति वर्ष की दर से गति करना आरंभ कर दिया.

भारतीय प्लेट के इतने तेज़ी से गति करने का सबसे प्रमुख कारण इसका अन्य प्लेटों की अपेक्षा काफ़ी पतला होना था. हाल ही में वर्षों में भारतीय प्लेट की गति लगभग 5 सेमी. प्रतिवर्ष है. इसकी तुलना में यूरेशियाई प्लेट की गति मात्र 2 सेमी. प्रतिवर्ष ही है. इसी वजह से भारत को ‘फास्टेस्ट कांटीनेंट’ की संज्ञा दी गई है.

करीब 10 करोड़ सालों तक यह प्रक्रिया महासागरों की प्लोट को कमजोर करती रही जिससे वह मुड़ने और टूटने की स्थिति में आने लगी. जिससे निम्नस्खलन की शुरुआत से उसका संबंध बन गया. येल की शोध वैज्ञानिक एल्वीरिया मुल्युकोवा ने बताया, ‘ग्रहों में टेक्टोनिकल प्लेट की वास्तविक बाधा यही है कि विशालकाय पथरीली परतें कितनी जल्दी विकृत हो सकती हैं.’

 

Published by Yash Sharma on 16 Feb 2021

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